
RSS प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
RSS On UGC Rules: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए ‘समता नियमों’ पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का बड़ा बयान सामने आया है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने स्पष्ट किया है कि आरएसएस समाज में एकता बनाए रखने के पक्ष में है और इसके लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, वह उठाए जाएंगे।
केंद्र सरकार ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने और भेदभाव की शिकायतों की जांच के लिए ‘समता समितियां’ गठित करने के नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तहत समितियों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), महिलाओं और दिव्यांगों की भागीदारी अनिवार्य की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के ढांचे को “प्रथम दृष्टया अस्पष्ट” बताते हुए इन पर रोक लगा दी है।
अदालत का मानना है कि इन नियमों के बहुत व्यापक परिणाम हो सकते हैं जो अंततः समाज को विभाजित कर सकते हैं और इनके खतरनाक प्रभाव हो सकते हैं। आंबेकर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चूंकि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, इसलिए विभिन्न लोग अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन संघ का मूल मंत्र समाज को एक सूत्र में पिरोए रखना है।
स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए RSS प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि संघ को 100 साल पूरे होने के बाद यह साबित करने या बताने की जरूरत नहीं है कि उसने देश की संप्रभुता और एकता के लिए क्या किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का गठन भी इसी उद्देश्य से हुआ था और उसने जो कुछ भी किया है, वह देश के लिए ही किया है।
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हाल ही में मुंब्रा को ‘हरे रंग’ में रंगने से जुड़े AIMIM पार्षद सहर शेख के विवादित बयान पर भी सुनील आंबेकर ने रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस देश का रंग हजारों वर्षों से भगवा रहा है। इसके अलावा, हालिया महानगरपालिका चुनावों में मराठी अस्मिता और भाषा के मुद्दे पर चल रही राजनीति, विशेषकर शिवसेना (UBT) और मनसे (MNS) के रुख के बीच, आंबेकर ने कहा कि आरएसएस के लिए सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने पुरानी परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि सभी भाषाएं एक साथ फलती-फूलती रही हैं और यदि लोग इस भाषाई इतिहास को भूल जाएंगे, तो समस्याएं उत्पन्न होंगी।






