लाडकी बहिन योजना हो जाएगी बंद! केवायसी प्रक्रिया महज एक बहाना, रोहित पवार के दावे से मचा हड़कंप
Rohit Pawar Ladki Bahin Yojana KYC Controversy 2026: लाडकी बहिन योजना से 81 लाख महिलाओं के नाम हटाने पर भड़के रोहित पवार, कहा- केवाईसी महज योजना बंद करने का बहाना है।
- Written By: अनिल सिंह
लाडकी बहिन योजना पर रोहित पवार ने ट्वीट कर सरकार को दी बड़ी चेतावनी (फोटो क्रेडिट-X)
Rohit Pawar On Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र में महिलाओं को आर्थिक संबल देने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना अपने जन्मकाल से ही लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। चुनाव के दौरान इस योजना ने महायुति के पक्ष में एक बड़ा माहौल तैयार किया था, लेकिन अब यही योजना राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुकी है। हाल ही में सरकार द्वारा अनिवार्य की गई ई-केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लाखों गरीब महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से साफ कर दिए गए हैं। इस प्रशासनिक कदम के बाद से ही विपक्ष ने सरकार को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है।
विधायक रोहित पवार ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (ट्विटर) पर एक तीखा पोस्ट साझा करते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा कि जो सरकार आज तकनीकी कमियों को आगे कर इन प्रिय बहनों को ‘फर्जी लाभार्थी’ करार दे रही है, उसने चुनाव जीतने के लिए मतदान से ठीक पहले बिना किसी कड़े केवाईसी जांच के इस योजना को आनन-फानन में क्यों लागू किया था? रोहित पवार के अनुसार, यह राज्य की करोड़ों माताओं और बहनों के साथ किया गया एक घिनौना और राजनीतिक धोखा है।
निवडणुकीपूर्वी 2.47 कोटी लाभार्थी असलेल्या लाडकी बहीण योजनेत या लबाड सरकारने 81 लाख लाडक्या बहिणींची नावे उडवली आहेत. KYC फक्त बहाणा आहे, लाभार्थी लाडक्या बहिणींची नावे टप्प्याटप्प्याने उडवून योजना बंद करणे हाच खरा निशाणा आहे. आज या लाडक्या बहिणीला बोगस लाभार्थी म्हणणाऱ्या… — Rohit Pawar (@RRPSpeaks) June 1, 2026
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खजाने पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए तकनीक का सहारा
राजनीतिक विश्लेषकों और वित्तीय जानकारों के अनुसार, लाडकी बहिन योजना के कारण राज्य के खजाने पर हर महीने करीब 3,700 करोड़ रुपये का भारी-भरकम वित्तीय भार पड़ रहा है। लगातार बढ़ते इस खर्च के कारण सरकार के अन्य विकास कार्यों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बजटीय आवंटन पर इसका सीधा असर दिख रहा है। यही वजह है कि विपक्ष को यह पक्का संदेह है कि सरकार जानबूझकर ई-केवाईसी और अन्य जटिल तकनीकी त्रुटियों का हवाला देकर वैध लाभार्थियों की संख्या को बड़े पैमाने पर घटाना चाहती है।
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‘अगर बहनों को परेशान किया तो सरकार को चुकानी होगी भारी कीमत’
रोहित पवार ने अपने बयान में सरकार को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस प्रक्रिया के नाम पर राज्य की किसी भी लाडकी बहिन को दफ्तरों के चक्कर कटवाकर परेशान किया गया, या उनसे पूर्व में दी गई राशि को वापस लेने (रिकवरी) का कोई भी प्रयास किया गया, तो महायुति सरकार को इसकी बहुत भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय वोट बटोरने के लिए रेवड़ियों की तरह बांटे गए पैसे की भरपाई अब महिलाओं को अपात्र बनाकर नहीं की जा सकती।
महाराष्ट्र में ‘लाडकी बहिन’ बनाम ‘अपात्र बहिन’ पर छिड़ा नया सियासी दंगल
इस पूरे विवाद के बाद ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों की महिलाओं में असमंजस और भारी असंतोष का माहौल है। कई जिलों में ई-केवाईसी केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां सर्वर डाउन होने और कागजी विसंगतियों के कारण उनके फॉर्म खारिज हो रहे हैं। रोहित पवार के इस विस्फोटक ट्वीट ने महाविकास आघाड़ी के अन्य घटकों को भी सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक उग्र होने के आसार हैं।
