रामदास आठवले का खुलासा, नरवणे की किताब पर राहुल गांधी को बोलने से क्यों रोका गया
Ramdas Athawale on Rahul Gandhi: रामदास आठवले ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र करने पर उन्हें टोका गया।
- Written By: अनिल सिंह
Ramdas Athawale on Rahul Gandhi (फोटो क्रेडिट-X)
MM Naravane Book Controversy Lok Sabha: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा लगाए गए “सदन में बोलने न देने” के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और आरपीआई (आठवले) के प्रमुख रामदास आठवले ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आठवले ने इन दावों को पूरी तरह से निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया है। उनका कहना है कि संसद किसी एक पार्टी की जागीर नहीं है और वहां हर सदस्य को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। आठवले के अनुसार, राहुल गांधी को तब रोका जाता है जब वे सदन की गरिमा के विरुद्ध गलत बयानबाजी या असत्यापित संदर्भों का उपयोग करते हैं।
रामदास आठवले ने स्पष्ट किया कि स्पीकर द्वारा हस्तक्षेप तभी किया जाता है जब विपक्ष हंगामा करता है या चर्चा की मर्यादा लांघता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी अक्सर राष्ट्रपति के अभिभाषण या अन्य महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान लंबे समय तक अपनी बात रखते हैं, फिर भी ‘बोलने न देने’ का कार्ड खेलना उनकी राजनीति का हिस्सा बन गया है। आठवले के मुताबिक, ऐसे निराधार आरोप लगाकर राहुल गांधी देश के सामने अपनी ही छवि खराब कर रहे हैं।
Delhi: Union Minister Ramdas Athawale says, “I don’t think it is that only Rahul Gandhi is stopped. Whenever there is a discussion on any issue, if someone makes a wrong statement, the Speaker stops them. In this context, I think it is not right for Rahul Gandhi to make such… pic.twitter.com/iXnx6ZgrWn — IANS (@ians_india) March 11, 2026
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एमएम नरवणे की किताब और गलत संदर्भ का मुद्दा
रामदास आठवले ने राहुल गांधी को रोकने के पीछे का एक प्रमुख कारण पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब से जुड़े विवाद को बताया। आठवले ने खुलासा किया कि राहुल गांधी ने सदन में एक ऐसी किताब का संदर्भ दिया था जो उस समय तक प्रकाशित (Publish) भी नहीं हुई थी। पब्लिशिंग हाउस ने स्वयं स्पष्ट किया था कि किताब अभी बाजार में नहीं आई है। आठवले ने तंज कसते हुए कहा कि जब आप एक ऐसी चीज का हवाला देते हैं जिसका अस्तित्व ही नहीं है, तो सदन और स्पीकर को हस्तक्षेप करना ही पड़ता है। गलत रिफरेंस देकर देश को गुमराह करना संसदीय परंपरा के खिलाफ है।
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विपक्ष के हंगामे और सदन की कार्यवाही
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के उन दावों को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। आठवले का तर्क है कि सदन में सभी को बोलने का मौका दिया जाता है, लेकिन जब विपक्ष केवल हंगामा करने और कार्यवाही में बाधा डालने के उद्देश्य से आता है, तब अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी अक्सर आधा-पौना घंटा लगातार भाषण देते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि उन्हें पर्याप्त समय मिलता है। समस्या समय की नहीं, बल्कि उनके द्वारा दिए जाने वाले बयानों की सत्यता की है।
आत्म-मंथन की सलाह और संसद की गरिमा
रामदास आठवले ने राहुल गांधी को आत्म-मंथन की सलाह देते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है और यहां तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “सदन सबका होता है” और नियमों के दायरे में रहकर कोई भी अपनी बात कह सकता है। आठवले के अनुसार, राहुल गांधी को गलत संदर्भों और विवादित टिप्पणियों से बचना चाहिए ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को केवल विरोध के लिए विरोध करने के बजाय रचनात्मक चर्चा में भाग लेना चाहिए, जो राष्ट्रहित में है।
