क्या आशा भोसले के शोक प्रस्ताव पर भेल खाई थी? मराठी न पढ़ पाने को लेकर राहुल नार्वेकर पर भड़के राज ठाकरे
Raj Thackeray Slams Rahul Narwekar Asha Bhosle: दिवंगत गायिका आशा भोसले के शोक प्रस्ताव को विधानसभा में गलत पढ़ने पर स्पीकर राहुल नार्वेकर पर भड़के मनसे प्रमुख राज ठाकरे।
- Written By: अनिल सिंह
राहुल नार्वेकर, आशा भोसले और राज ठाकरे (फोटो क्रेडिट-X)
Raj Thackeray Rahul Narwekar Asha Bhosle: महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे ‘ऑपरेशन टाइगर’ के घमासान में अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे की भी विस्फोटक एंट्री हो गई है। हाल ही में दिवंगत हुईं पद्म विभूषण और देश की सदाबहार गायिका आशाताई भोसले के निधन पर विधानसभा में रखे गए शोक प्रस्ताव के दौरान हुए एक घटनाक्रम को लेकर राज ठाकरे का गुस्सा फूट पड़ा है। राज ठाकरे ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) राहुल नार्वेकर द्वारा शोक प्रस्ताव पढ़ते समय मराठी भाषा के गलत उच्चारण और त्रुटियों पर अत्यंत तीखी नाराजगी व्यक्त की है।
राज ठाकरे ने बेहद तल्ख लहजे में तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या स्पीकर ने अपनी मेज पर रखे उस महत्वपूर्ण कागज पर भेल खाई थी, जो वे उस पर लिखी आधिकारिक मराठी भाषा को भी ढंग से नहीं पढ़ पाए?
पद्मविभूषण आशाताई भोसलेंच्या निधनाचा शोकप्रस्ताव मांडताना, विधानसभा अध्यक्ष श्री. राहुल नार्वेकर यांनी ज्या पद्धतीने मराठी भाषेची चिरफाड केली आणि कागदावर लिहून दिलेलं मराठी पण त्यांना वाचता येत नाही हे पाहून संताप, उद्वेग दोन्ही दाटून आला. वाचण्या आधी त्या कागदातून भेळ खाल्ली… — Raj Thackeray (@RajThackeray) June 23, 2026
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दीनानाथ मंगेशकर को ‘दीनदयाल’ पढ़ गए स्पीकर नार्वेकर
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने राहुल नार्वेकर की भाषाई समझ पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर राहुल नार्वेकर ने आशाताई की मृत्यु पर यह शोक प्रस्ताव स्वाहिली या हिब्रू भाषा में पेश किया होता, तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होता। क्योंकि उन्हें मराठी तो समझ आती नहीं, और स्वाहिली-हिब्रू किसी और को समझ नहीं आती।” राज ठाकरे ने आगे बताया कि सबसे दुखद बात यह रही कि नार्वेकर पढ़ते समय दिग्गज संगीतकार पंडित दीनानाथ मंगेशकर की जगह ‘दीनदयाल उपाध्याय’ और ‘दीनदयाल मंगेशकर’ का उल्लेख कर रहे थे। ठाकरे ने भाजपा पर चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा ने आजकल जितनी अंधाधुंध भर्तियां (दलबदल) शुरू की हैं, उससे उनकी हालत तेल, घी और अगरबत्ती जैसी मिक्स हो गई है; तभी उनके नेताओं को दीनानाथ मंगेशकर और दीनदयाल उपाध्याय के बीच का अंतर भी नहीं मालूम।
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‘गुलाबी आंखें’ गाते हैं फडणवीस, क्या उन्हें भी इस गंभीरता का एहसास नहीं?
राज ठाकरे ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में मौजूद वरिष्ठ विधायकों की चुप्पी पर भी गहरा खेद जताया। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि फडणवीस उस समय सदन में थे या नहीं, लेकिन अगर वे थे भी, तो उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। फडणवीस खुद संगीत के शौकीन हैं और कई बार ‘गुलाबी आंखें जो तेरी देखी’ जैसे गाने (जिनकी धुनें वे खुद गुनगुनाते हैं) गाते नजर आते हैं। उन्हें कम से कम यह तो समझना चाहिए था कि आज हम राज्य की विधानसभा में किस महान संगीत घराने के व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और इसकी गंभीरता क्या है। लेकिन उनके लिए यह सब महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है, चाहे दीनानाथ मंगेशकर कहें या दीनानाथ चौहान।”
’50 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा है एकनाथ शिंदे का विमान’
स्पीकर के इस भाषण के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर दर्ज होने की बात कहते हुए राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, “क्या राज्य के मुख्यमंत्रियों को इस बात का जरा भी एहसास नहीं है कि महाराष्ट्र की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियां इस रिकॉर्डेड भाषण को देखेंगी? एक व्यक्ति को केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि बुद्धिमान भी होना चाहिए।” शिंदे की खिंचाई करते हुए राज ठाकरे ने आगे कहा, “उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का तो वैसे भी इस सब से कोई लेना-देना नहीं है। उनका विमान तो हमेशा 50,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा है, तो मराठी भाषा के अध्ययन और गौरव से उनका क्या संबंध होगा? जब हमारे महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष अपने सामने रखे कागज की मराठी नहीं पढ़ सकते, तो वह विधानसभा भला मराठी भाषा के दमन पर क्या कार्रवाई करेगी?”
