राज का शिंदे पर प्रहार -बोले, ठाकरे के उत्तराधिकारी कैसे? (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Mumbai News: शिवसेना प्रमुख (दिवंगत) बालासाहेब ठाकरे की सोमवार को पुण्यतिथि थी। इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे दादर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में बने बालासाहेब के स्मृति स्थल पर पहुंचे। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और बालासाहेब के पुत्र उद्धव ठाकरे भी मौजूद थे। स्मृति स्थल पर पहुंचने से पहले, राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर अप्रत्यक्ष रूप से तीखा प्रहार किया।
पोस्ट में राज ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि “बालासाहेब की छवि चुरा कर खुद को उनके हिंदुत्ववादी विचारों का उत्तराधिकारी बताने वालों पर मुझे हंसी आती है।” राज ने सवाल उठाया कि आखिर शिंदे, बालासाहेब के उत्तराधिकारी कैसे बन सकते हैं?
राज ने अपनी पोस्ट में लिखा, “आज शिवसेना के संस्थापक, हिंदू हृदयसम्राट और मेरे चाचा स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि है। उन्होंने भाषाई पहचान के आधार पर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया और उससे एक राजनीतिक दल की स्थापना हुई। बाद में, जातीय पहचान की राजनीति के बढ़ते दौर में और भारतीय जनता पार्टी द्वारा कमंडलवाद के प्रसार से पहले, हिंदू पहचान स्थापित करने का काम भी बालासाहेब ने किया। लेकिन वे हिंदुओं को सिर्फ वोट बैंक के रूप में नहीं देखते थे।यह उनके लिए पहचान और धर्म के प्रति प्रेम का विषय था।”
उप मुख्यमंत्री शिंदे पर नाम लिए बिना हमला बोलते हुए राज ने लिखा, “सुनने-पढ़ने के अभाव के कारण वे (शिंदे) न तो बालासाहेब को जानते हैं और न ही प्रबुद्धजनों को। उन्हें अंदाजा ही नहीं कि बालासाहेब के विचार कितने व्यापक और समृद्ध थे।” राज ने आगे लिखा कि “जब राजनीति को सिर्फ सत्ता पाने और सत्ता मिलने के बाद मनमानी करने का जरिया समझ लिया गया है, ऐसे समय में पहले समाजसेवा और फिर राजनीति की नीति के प्रणेता बालासाहेब की स्मृति में मनसे की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।”
माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में बेटे अमित ठाकरे की हार की वजह से राज ठाकरे, डिप्टी सीएम शिंदे से नाराज़ हैं। शिवसेना में बगावत के समय राज ने शिंदे का अप्रत्यक्ष समर्थन किया था और लोकसभा चुनाव 2024 में उनके उम्मीदवारों का प्रचार भी किया। इसके बावजूद विधानसभा चुनाव 2024 में शिंदे ने माहिम सीट से अमित ठाकरे के मुकाबले अपने तत्कालीन विधायक सदा सरवणकर को उतारा।
बीजेपी के तत्कालीन मुंबई अध्यक्ष आशीष शेलार ने अमित के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने की अपील की थी, लेकिन शिंदे नहीं माने। नतीजन न अमित जीत पाए, न सरवणकर। इससे राज ठाकरे की काफी किरकिरी हुई और माना जा रहा है कि वे अमित की हार का ठीकरा शिंदे पर फोड़ते हैं।
ये भी पढ़े: महाराष्ट्र में बड़ा उलटफेर, शिंदे ने शरद पवार से मिलाया हाथ! भाजपा-अजित पवार से होगा मुकाबला
बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे पहले स्मृति स्थल पर पहुंच गए थे और राज ठाकरे का इंतजार करते रहे। राज के पहुंचने के बाद दोनों भाइयों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया।बीमार होने के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राऊत भी बालासाहेब की समाधि पर अभिवादन करने पहुंचे और सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
बीजेपी मीडिया विभाग के प्रदेश प्रमुख नवनाथ बन ने कहा, “राज ठाकरे शायद अपनी याददाश्त खो चुके हैं। बालासाहेब ने अपने हिंदुत्ववादी विचारों के लिए कभी राजनीतिक लाभ-हानि की परवाह नहीं की। राज भूल गए हैं कि उनके कट्टर हिंदुत्ववादी रुख के कारण उनका वोट देने का अधिकार भी छीन लिया गया था। उनकी याददाश्त अच्छी है, लेकिन बालासाहेब की हिंदुत्ववादी नीति के मामले में शायद उनकी याददाश्त कमजोर पड़ गई है।”