‘तरबूज से तौबा’, 4 लोगों की मौत का कारण बने इस फल की वजह से मुंबई में दहशत, विसरा रिपोर्ट का हो रहा इंतजार
Mumbai Watermelon Death: मुंबई के पायधुनी में तरबूज खाने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत। विसरा रिपोर्ट का इंतजार, इलाके में तरबूज की बिक्री पर रोक।
- Written By: अनिल सिंह
Watermelon Food Poisoning Mumbai (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
Watermelon Food Poisoning Mumbai: मुंबई के पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध मौत के बाद पूरे शहर में ‘तरबूज’ को लेकर खौफ फैल गया है। डोकाडिया परिवार के साथ घटी इस भयावह घटना ने न केवल स्थानीय नागरिकों को डरा दिया है, बल्कि दक्षिण मुंबई की प्रमुख फल मंडियों, विशेषकर नलबाजार में तरबूज का कारोबार ठप कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल इलाके में तरबूज बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
घाटी मोहल्ला स्थित मुगल उमरेट्टी भवन में रहने वाले अब्दुल्ला डोकाडिया (40), उनकी पत्नी नसरीन (35) और दो बेटियों, आयशा (16) व ज़ैनब (13) की मौत के पीछे शुरुआती तौर पर ‘फूड पॉइजनिंग’ का संदेह जताया जा रहा है।
डॉ. कुरैशी की आपबीती: ‘खून में बन गया था एसिड’
एबीपी माझा के मुताबिक इसी इमारत में रहने वाले डॉ. कुरैशी ने इस रूह कंपा देने वाली रात का ब्यौरा देते हुए बताया कि परिवार ने रात करीब 1:30 बजे तरबूज खाया था। तड़के 4-5 बजे के करीब जब उन्हें बुलाया गया, तो घर का नजारा भयावह था। डॉ. कुरैशी के अनुसार, “पूरे घर में उल्टियां बिखरी पड़ी थीं और चारों सदस्य बेहोश थे। छोटी बच्ची की नब्ज नहीं चल रही थी। उन्हें साबू सिद्दीकी और जे.जे. अस्पताल ले जाया गया, लेकिन शरीर में जहरीला पदार्थ इतनी तेजी से फैला कि उनके खून में एसिड बन गया और अंग फेल होने लगे।”
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साजिश या दुर्घटना? पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
मुंबई पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। हालांकि, जांच में एक पेंच फंस गया है—पुलिस ने इलाके के अन्य फल विक्रेताओं और उन ग्राहकों से पूछताछ की जिन्होंने उसी दुकान से तरबूज खरीदे थे, लेकिन कहीं और जहर का कोई मामला सामने नहीं आया है। इससे पुलिस को संदेह है कि क्या यह केवल ‘फूड पॉइजनिंग’ है या परिवार को किसी अन्य माध्यम से जहर दिया गया है?
मौत का असली कारण
सच्चाई का पता लगाने के लिए मृतकों के आंतरिक अंगों (Viscera) को रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मौत का असली कारण तरबूज में मौजूद कोई रसायन था या कोई बाहरी साजिश। तब तक, नलबाजार और आसपास के इलाकों में फल विक्रेताओं से तरबूज खरीदने को कोई तैयार नहीं है और बाजार में पूरी तरह सन्नाटा पसरा है।
