स्मृति ईरानी के समय कहां था चुनाव आयोग? मीनाक्षी नटराजन के नामंकन रद्द होने पर भड़की प्रियंका चतुर्वेदी
Priyanka Chaturvedi on Meenakshi Natarajan: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी; स्मृति ईरानी का जिक्र कर चुनाव आयोग पर साधा निशाना।
- Written By: अनिल सिंह
मीनाक्षी नटराजन मामले में चुनाव आयोग पर भड़की प्रियंका चतुर्वेदी, स्मृति ईरानी की दिलाई याद (फोटो क्रेडिट-X)
Priyanka Chaturvedi Target Smriti Irani Over Meenakshi Natarajan Nomination: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद देश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। इस फैसले के खिलाफ विपक्ष ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधे निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिवसेना (UBT) की वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी के पुराने विवादों का जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का रवैया विपक्षी नेताओं के प्रति पक्षपातपूर्ण और भेदभाव से भरा हुआ है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रियंका चतुर्वेदी के अनुसार, नटराजन को चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने का एक भी मौका नहीं दिया गया।
Smriti Irani ji of the BJP can contest with three different educational qualifications in her LS affidavits, EC ignores all complaints but Meenakshi Natarajan of the Congress has her RS nomination cancelled because her affidavit doesn’t mention some obscure complaint with no FIR… — Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) June 9, 2026
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स्मृति ईरानी के समय कहां था चुनाव आयोग?
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने पोस्ट में लिखा कि भाजपा की नेता स्मृति ईरानी अपने अलग-अलग लोकसभा हलफनामों में तीन भिन्न शैक्षणिक योग्यताएं बताकर चुनाव लड़ जाती हैं और चुनाव आयोग उनके खिलाफ आई सभी शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल देता है। लेकिन इसके विपरीत, कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन बेहद मामूली आधार पर रद्द कर दिया जाता है।
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मामूली शिकायत के आधार पर कार्रवाई, नहीं दर्ज थी कोई एफआईआर
चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की दोहरी नीति का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस शिकायत के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज किया गया है, वह बेहद सामान्य थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस शिकायत को लेकर न तो कोई एफआईआर (FIR) दर्ज थी और न ही कोई कानूनी सजा हुई थी। इसके बावजूद बिना किसी विस्तृत सुनवाई या स्पष्टीकरण का अवसर दिए रिटर्निंग ऑफिसर ने सीधे नामांकन को निरस्त करने का एकतरफा कदम उठा लिया। विपक्ष इस पूरी प्रक्रिया को दुर्भावना से प्रेरित मान रहा है और उसका कहना है कि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों के खिलाफ है।
दिग्विजय सिंह बोले- एकजुट होकर लड़ेंगे
इस पूरे विवाद पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि स्थानीय रिटर्निंग ऑफिसर ने जो फैसला लिया है, वह घोर असंवैधानिक और नियमों के परे है। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने बहुत ही पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करते हुए सत्तापक्ष के दबाव में यह निर्णय लिया है। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस का पूरा प्रतिनिधिमंडल और विपक्ष इस तानाशाही के खिलाफ एकजुट होकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर दर्ज कराई आपत्ति
पर्चे को दुर्भावनापूर्ण तरीके से खारिज किए जाने के खिलाफ बुधवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का एक भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल सीधे केंद्रीय निर्वाचन आयोग के मुख्यालय पहुंचा। इस दल में कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, रणदीप सुरजेवाला, दीपा दासमुंशी और वरिष्ठ कानूनविद् विवेक तन्खा व अभिषेक मनु सिंघवी शामिल थे। खुद मीनाक्षी नटराजन भी इस दौरान आयोग के दफ्तर में मौजूद रहीं। नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों अन्य आयुक्तों को पूरे मामले के तकनीकी तथ्यों से अवगत कराते हुए मांग की है कि इस लोकतंत्र विरोधी फैसले को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
