

Pratap Sarnaik On Marathi Language Rule: महाराष्ट्र में रिक्शा-टैक्सी-कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने संबधी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के आदेश को लेकर घमासान मचा हुआ है। परिवहन मंत्री के इस निर्णय को लेकर जहां कुछ यूनियनों ने विरोध जताया है, वहीं मुंबई एमएमआर के अधिकांश परप्रांतिय रिक्शा टैक्सी चालकों को डर है कि कहीं उनका लाइसेंस बैच न छीन लिया जाए। नया नियम महाराष्ट्र दिवस यानी 1 मई से लागू होगा। नियम के मुताबिक रिक्शा टैक्सी या कैब चालकों को राज्य की भाषा मराठी बोलना समझना आना ही चाहिए।
इस मुद्दे पर मचे घमासान के बीच परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने नवभारत लाइव से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि हमारा मकसद रोजी रोटी छीनना नहीं बल्कि स्थानीय भाषा व संस्कृति को बढ़ावा देना है। परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा कि यह कोई नया नियम नहीं है,बल्कि 2019 का जीआर है। हर रिक्शा टैक्सी चालक को स्थानीय भाषा यानी मराठी लिखने, बोलने समझने का ज्ञान होना ही चाहिए। इस मामले में कुछ लोग वेवजह राजनीति कर रहे हैं। प्रताप सरनाईक ने कहा कि लायसेंस बैच या परमिट देते समय ही एफिडेविट के तहत चालकों को मराठी भाषा अनिवार्य की गई है। इसके बावजुद कुछ जगहों पर रिक्शा टैक्सी चालकों व ग्राहकों के बीच भाषा को लेकर विवाद के बाद निर्णय लिया गया।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि भाषा किसी पर लादी नहीं जा रही है। बल्कि यह निर्णय यात्रियों के साथ बेहतर संवाद एवं स्थानीय भाषा के सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि इससे किसी रिक्शा टैक्सी ड्राइवर को डरने की जरूरत नहीं है। यदि कोई इतने साल में मराठी भाषा समझ या साधारण बोल नहीं पाता तो उसे लायसेंस पाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिक्शा टैक्सी चालकों के लाइसेंस रद्द नहीं होगा बल्कि उन्हें एक मौका सीखने का दिया जाएगा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नियम मोटर वाहन नियमों के तहत आता है और इसकी सख्ती से पालन किया जाएगा। परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा कि हम बालासाहेब ठाकरे के विचारों पर चलने वाले शिवसैनिक हैं,हमारे नेता एकनाथ शिंदे स्वयं सभी के साथ हमेशा खड़े रहे हैं। परिवहन मंत्री ने कहा कि उनके निर्णय के बाद बीजेपी सहित अन्य दलों के लोग भी अब रिक्शा टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सिखाने के लिए बैनर लगा रहे हैं।
परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि अधिकांश रिक्शा टैक्सी ड्राइवरों को मराठी भाषा बोलनी समझनी आती है। सवाल सिर्फ उन्हीं का नहीं बल्कि ग्राहकों का भी है। उन्हें भी मराठी में संवाद कर रिक्शा टैक्सी ड्राइवरों का उत्साहवर्धन करना चाहिए। मुंबई एमएमआर में देखा गया है कि ज्यादातर मराठी मुसाफिर भी रिक्शा टैक्सी ड्राइवरों से हिंदी में ही संवाद करते हैं।
मराठी भाषा अनिवार्यता पर परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसमें चालकों की मराठी भाषा की जांच की हो रही है। बताया गया कि मीरा भायंदर में शुरू किए गए इस अभियान में लगभग 3 हजार रिक्शा टैक्सी चालकों की जांच की गई। उनमें लगभग 280 रिक्शा चालक ऐसे मिले जिन्हें मराठी बोलने समझने में कठिनाई हो रही थी।
उधर इस फैसले पर महाराष्ट्र ऑटोरिक्शा चालक-मालक संघटना संयुक्त कृती समिती ने विरोध जताया है। संगठन के अध्यक्ष शशांक राव का कहना है कि इससे भाषा विवाद बढ़ेगा। उन्होंने इस मामले में सरकार व परिवहन मंत्री से पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि भाषा को लेकर अब तक कोई समस्या नहीं आई है। यूनियनों का कहना है कि चालकों को पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि वे बिना किसी परेशानी के इस नियम का पालन कर सकें। लेकिन अचानक सख्ती और लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी से डर और चिंता का माहौल बना हुआ है।