सफेद पट्टी विवाद का साइड इफेक्ट? प्रसाद वेदपाठक का इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड, सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
Ghatkopar White Strip Controversy: घाटकोपर सफेद पट्टी विवाद के बाद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रसाद वेदपाठक का इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड। 'X' पर निकाली भड़ास; इंटरनेट पर छिड़ी नई बहस। पढ़ें पूरा मामला।
- Written By: गोरक्ष पोफली
प्रसाद वेदपाठक (सोर्स: सोशल मीडिया)
Prasad Vedpathak Instagram Account Suspended: मुंबई के घाटकोपर में सफेद पट्टी विवाद को लेकर चर्चा में आए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और स्थानीय निवासी प्रसाद वेदपाठक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लेकिन इस बार वजह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनका अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। जानकारी के अनुसार, प्रसाद वेदपाठक का इंस्टाग्राम अकाउंट, जिस पर उनके विरोध के वीडियो वायरल हुए थे, अचानक सस्पेंड कर दिया गया है। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई तरह के संशय पैदा हो गए हैं, क्योंकि यह निलंबन ठीक उसी समय हुआ है जब घाटकोपर सोसाइटी का विवाद पुलिस की मध्यस्थता के बाद सुलझा था।
सच बोलने की मिली सजा? प्रसाद ने एक्स पर निकाली भड़ास
अपना इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड होने के बाद प्रसाद वेदपाठक ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस कार्रवाई की जानकारी साझा की। उन्होंने एक भावुक पोस्ट में लिखा, सच बोलने का फल ऐसा ही मिलता है…। उनके इस बयान ने यह संकेत दिया है कि उन्हें लगता है कि उनके अकाउंट पर यह कार्रवाई किसी सोची-समझी साजिश या सफेद पट्टी के खिलाफ उनके कड़े रुख के कारण हुई है। इंस्टाग्राम द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार, उनका अकाउंट 11 जून 2026 को सस्पेंड किया गया है।
This is what you get for speaking for what is right… pic.twitter.com/4KG4QeUlck — Prasad Vedpathak (@prasadvedpathak) June 11, 2026
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क्या था पूरा सफेद पट्टी विवाद?
यह पूरा मामला मुंबई के घाटकोपर पूर्व स्थित कैलास एवेन्यू हाउसिंग सोसाइटी से शुरू हुआ था। सोसाइटी के कॉमन एरिया और सीढ़ियों पर जैन भिक्षुओं के चलने के लिए एक लंबी सफेद पट्टी पेंट की गई थी। जैन धर्म के अहिंसा के सिद्धांत के अनुसार, मानसून के दौरान काई में पनपने वाले सूक्ष्म जीवों को पैरों के नीचे आने से बचाने के लिए यह पट्टी बनाई गई थी।
हालांकि, सोसाइटी निवासी प्रसाद वेदपाठक ने इस पर यह कहते हुए पुरजोर विरोध किया कि हाउसिंग सोसाइटी एक साझा स्थान है और यहाँ किसी विशेष धार्मिक प्रथा के निशान लगाना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि वे अपनी परंपराओं जैसे पशु बलि को साझा स्थान पर लाना चाहें, तो क्या वह सही होगा? उनके इस वीडियो के वायरल होने के बाद मामला गरमा गया और इसमें महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की भी एंट्री हुई। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इसे कल्चरल टेररिज्म करार देते हुए तीखी चेतावनी दी थी।
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पुलिस की मध्यस्थता और विवाद का समाधान
सोशल मीडिया पर बढ़ते तनाव को देखते हुए मुंबई पुलिस ने इस मामले में दखल दिया। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और एक बीच का रास्ता निकाला गया। समाधान के तहत, विवादित सफेद पट्टियों को हटाकर उन पर अन्य रंगों से पेंट कर दिया गया, जिससे वह धार्मिक निशान के रूप में न दिखें। प्रसाद ने खुद सोशल मीडिया पर पुष्टि की थी कि मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है और वे इसे खत्म करके आगे बढ़ना चाहते हैं।
लेकिन अब अचानक उनके मुख्य प्रचार मंच इंस्टाग्राम का सस्पेंड होना कई सवाल खड़े कर रहा है। समर्थकों का मानना है कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि कुछ इसे तकनीकी नियमों का उल्लंघन बता रहे हैं। फिलहाल, महाराष्ट्र की डिजिटल दुनिया में यह ‘सस्पेंशन’ चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।
