पवई झील (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: लगातार बढ़ते प्रदूषण और नागरिकों के दबाव के बाद आखिरकार बीएमसी ने पवई झील को बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। झील में वर्षों से जा रहे गंदे पानी को रोकने के लिए अब सीवेज डायवर्जन का कार्य शुरू कर दिया गया है।
इस पहल को मुंबई के शहरी आर्द्रभूमि (अर्बन वेटलैंड) पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पवई झील को केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रमुख आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता प्राप्त है, इसके बावजूद बीते कई वर्षों से यहां प्रतिदिन करीब 18 मिलियन लीटर बिना उपचारित सीवेज छोड़ा जा रहा था।
इससे झील का जल अत्यधिक प्रदूषित हो गया था और जलकुंभी जैसी आक्रामक वनस्पतियों का तेजी से प्रसार हुआ, जिससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घटती चली गई। इस प्रदूषण का सीधा असर झील की जैव विविधता पर पड़ा है।
मछलियों की संख्या में गिरावट आई, वहीं संरक्षित दलदली मगरमच्छों के आवास पर भी खतरा बढ़ गया। स्थानीय नागरिक समूहों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने लंबे समय तक आंदोलन, शिकायतें और पत्राचार कर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की थी।
नागरिकों के निरंतर दबाव के बाद अब बीएमसी ने झील में गिरने वाले सीवेज को वैकल्पिक मार्ग से मोड़ने का काम शुरू किया है। इसके तहत नई सीवर लाइनें, पंपिंग सिस्टम और जल निकासी ढांचे को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि गंदा पानी सीधे झील में न पहुंचे।
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बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का लक्ष्य मई 2026 तक पवई झील में शून्य प्रत्यक्ष सीवेज प्रवाह सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही भविष्य में सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) की स्थापना और जलकुंभी हटाने जैसे कार्य भी प्रस्तावित हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो पवई झील न केवल फिर से जीवंत हो सकती है, बल्कि मुंबई के शहरी पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगी।