आदित्य ठाकरे पर बेबुनियाद आरोप से भड़की प्रियंका चतुर्वेदी, अरविंद सावंत ने संसद में किया पलटवार
Nishikant Dubey Aditya Thackeray Allegation: संसद में आदित्य ठाकरे पर निशिकांत दुबे के आरोप से मचा बवाल। अरविंद सावंत और प्रियंका चतुर्वेदी ने किया पलटवार। माफी की मांग।
- Written By: अनिल सिंह
Nishikant Dubey Aditya Thackeray Allegation (फोटो क्रेडिट-X)
Priyanka Chaturvedi Video on Nishikant Dubey: संसद के नए भवन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चल रही ऐतिहासिक चर्चा आज उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच निजी हमलों और तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी बात रखते हुए शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने जब भाजपा के पूर्व विधायक और दुष्कर्म के दोषी कुलदीप सेंगर तथा बृज भूषण सिंह का मुद्दा उठाया, तो सदन का माहौल गरमा गया। इसके जवाब में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने महाराष्ट्र के युवा नेता आदित्य ठाकरे का नाम लेकर एक गंभीर और बेबुनियाद आरोप मढ़ दिया, जिससे महा विकास अघाड़ी के सांसद आक्रोशित हो गए।
सांसद अरविंद सावंत ने महिला सुरक्षा के सवाल पर सरकार को घेरते हुए पूछा कि क्या अपराधियों को संरक्षण देना ही नारी शक्ति का सम्मान है? उन्होंने कहा कि आरक्षण से पहले महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले नेताओं पर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। इसी दौरान निशिकांत दुबे ने हस्तक्षेप करते हुए आदित्य ठाकरे का नाम लिया और उन पर एक अभिनेत्री की मौत से जुड़ा आपत्तिजनक आरोप लगाया। इस टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। सावंत और सुप्रिया सुले ने तुरंत खड़े होकर इसका कड़ा विरोध किया और याद दिलाया कि आदित्य ठाकरे इस सदन के सदस्य भी नहीं हैं, इसलिए उनका नाम लेना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।
प्रियंका चतुर्वेदी का तीखा हमला और माफी की मांग
शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटना पर एक वीडियो संदेश जारी कर भाजपा को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक सजायाफ्ता बलात्कारी (कुलदीप सेंगर) का बचाव करने के लिए भाजपा सांसद एक ऐसे नेता पर कीचड़ उछाल रहे हैं, जो सदन में अपना बचाव करने के लिए मौजूद भी नहीं है। प्रियंका ने इसे भाजपा की हताशा करार देते हुए मांग की कि निशिकांत दुबे को अपने अनर्गल और सनसनीखेज आरोपों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
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संसद में गूंजे गोधरा और एपस्टीन जैसे विवादित नाम
हंगामे के दौरान अरविंद सावंत ने भी पलटवार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने निशिकांत दुबे को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे बेबुनियाद आरोप लगाएंगे, तो विपक्ष भी ‘गोधरा कांड’ और ‘तड़ीपार’ जैसे पुराने विवादों को कुरेदने से पीछे नहीं हटेगा। सावंत ने अमित शाह का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा और चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अपना मुंह खोला तो सत्ता पक्ष के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। सदन में बढ़ते तनाव को देखते हुए स्पीकर से इन विवादित टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने की मांग की गई।
आरक्षण के गणित और परिसीमन पर सवाल
विवादों के बीच अरविंद सावंत ने महिला आरक्षण विधेयक की तकनीकी खामियों पर भी प्रहार किया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि मंशा साफ है, तो मौजूदा 544 सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का साहस क्यों नहीं दिखाया जा रहा? निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन (परिसीमन) के जरिए सांसदों की संख्या बढ़ाकर आरक्षण देने की योजना को उन्होंने एक राजनीतिक चाल बताया। सावंत ने जोर देकर कहा कि विपक्ष आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि परिसीमन के नाम पर होने वाले क्षेत्रीय असंतुलन और देरी के खिलाफ है।
