किरायेदार अब नहीं होंगे बेदखल! बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रॉपर्टी में हिस्सा खरीदा तो कहलाएंगे सह-स्वामी
Tenant Rights: बॉम्बे हाईकोर्ट ने किरायेदार और मकान मालिक विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट के अनुसार, यदि किरायेदार संपत्ति का हिस्सा खरीद लेता है, तो उसे बेदखल नहीं किया जा सकता।
- Written By: आकाश मसने
बॉम्बे हाईकोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bombay High Court Verdict On Tenant Rights: महाराष्ट्र में किरायेदारी और मालिकाना हक के पेचीदा कानूनी विवादों के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो राज्य के हजारों किरायेदारों के लिए राहत की बड़ी खबर लेकर आया है। न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की एकल पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई किरायेदार उस संपत्ति का कानूनी रूप से कुछ हिस्सा खरीद लेता है जिसमें वह रह रहा है, तो उसे अब किरायेदार मानकर बेदखल नहीं किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद दक्षिण मुंबई की एक पुरानी संपत्ति से शुरू हुआ था। इस मामले में एक व्यक्ति लंबे समय से एक मकान में किरायेदार के तौर पर रह रहा था। विवाद तब गहराया जब उस किरायेदार ने संपत्ति के मूल मालिकों में से एक के साथ कानूनी समझौता कर उस संपत्ति का कुछ हिस्सा खरीद लिया। इसके बाद, संपत्ति के अन्य सह-मालिकों ने आपत्ति जताई और उसे अब भी केवल एक ‘कि किरायेदार’ मानते हुए घर से बाहर निकालने (बेदखली) के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने इस कानूनी लड़ाई में तीन अलग-अलग किरायेदारों को पक्षकार बनाया था।
Tenant Rights: सह-स्वामी बनते ही बदल जाते हैं अधिकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जिस व्यक्ति को बेदखल करने की कोशिश की जा रही थी, उसने कानूनी कार्यवाही के दौरान ही संबंधित संपत्ति में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा खरीद लिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जैसे ही कोई किरायेदार संपत्ति में स्वामित्व अधिकार (Ownership Rights) प्राप्त कर लेता है, उसका ‘कि किरायेदार’ होने का दर्जा कानूनन समाप्त हो जाता है। इसके बाद वह उस संपत्ति का सह-स्वामी (Co-owner) माना जाता है।
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अपीलीय अदालत का आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए निचली अपीलीय अदालत द्वारा दिए गए बेदखली के आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ तौर पर टिप्पणी की कि एक सह-स्वामी को अन्य मालिकों द्वारा उसी संपत्ति से बाहर नहीं निकाला जा सकता, क्योंकि अब उसका दर्जा बराबरी का हो चुका है।
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हजारों किरायेदारों पर असर कानूनी
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में स्थित पुरानी ‘पगड़ी’ संपत्तियों या लंबी अवधि के किराये के मामलों में यह फैसला नजीर साबित होगा। अक्सर सह-मालिकों के बीच विवाद के कारण किरायेदार असुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन अब यदि वे संपत्ति का कुछ हिस्सा खरीदने में सफल रहते हैं, तो उन्हें ‘सह-स्वामी का कवच’ (Co-owner’s Shield) मिल जाएगा।
