अजीत की राकां में घमासान, प्रदेशाध्यक्ष तटकरे के विरोध में कई पदाधिकारियों का इस्तीफा
Ajit Pawar NCP Controversy: महाराष्ट्र में अजीत पवार गुट की एनसीपी में प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे की कार्यशैली के विरोध में कई पदाधिकारियों के इस्तीफे से पार्टी के अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
NCP leaders resignation Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में इन दिनों नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (RAK) के अजित पवार गुट में काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। एक के बाद एक, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के काम करने के तरीके से नाखुश होकर कई सीनियर पदाधिकारी इस्तीफा दे रहे हैं। इन इस्तीफों ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को सामने ला दिया है और महाराष्ट्र के पॉलिटिकल गलियारों में हलचल मचा दी है।
ताजा घटनाक्रम में, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एम्प्लॉइज ऑर्गनाइजेशन के प्रदेश अध्यक्ष गौतम खरात ने पार्टी की प्राइमरी मेंबरशिप और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खरत ने सुनील तटकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में सिर्फ कुछ खास लोगों और उनके रिश्तेदारों को ही ये सम्मान और पद दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वफादार कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और राज्य स्तर से जिस तरह के सहयोग की उम्मीद थी, वह नहीं दिया जा रहा है।
सालों तक पार्टी की वफादारी से सेवा की
उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि उन्होंने सालों तक पार्टी की वफादारी से सेवा की, लेकिन राज्य नेतृत्व से न तो उन्हें सही गाइडेंस मिली और न ही सम्मान। इससे पहले RAK मोटर सेल्स ट्रांसपोर्ट सेल के सचिन जाधव, इंडस्ट्रीज़ डिपार्टमेंट के स्टेट प्रेसिडेंट सुभाष मालवानी और अनऑर्गनाइज़्ड लेबर डिपार्टमेंट के स्टेट प्रेसिडेंट मनोज व्यवहारे भी अपने पदों से इस्तीफ़ा दे चुके हैं।
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“अपनों को डेलीगेशन, वर्कर्स का अपमान”
इस्तीफ़ा देने वाले पदाधिकारियों का आरोप है कि पार्टी में सिर्फ़ कुछ चुनिंदा लोगों और उनके परिवारों को ही अहमियत दी जा रही है, जबकि पुराने और वफ़ादार वर्कर्स को लगातार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
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बताया जा रहा है कि पहले के इस्तीफ़े 26 जनवरी को उस समय के डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर अजित पवार को सौंपे गए थे। उन्होंने उस समय इस्तीफ़ा देने से मना कर दिया था और बातचीत से हल निकालने की कोशिश की थी। लेकिन 28 जनवरी को प्लेन क्रैश में अजित पवार की मौत के बाद ये इस्तीफ़े बिना किसी बातचीत के मान लिए गए।
पार्टी के लिए चिंता की बात
लगातार हो रहे इन इस्तीफ़ों से पार्टी के अंदरूनी हालात पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पदाधिकारियों ने डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार से दखल देने की मांग की। अब देखना यह होगा कि पार्टी का टॉप लीडरशिप इस पॉलिटिकल संकट से कैसे निपटता है।
