Narhari Zirwal Transgender Video (फोटो क्रेडिट-X)
Narhari Zirwal Video: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में इस समय खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री नरहरी झिरवाल एक कथित वायरल वीडियो को लेकर चर्चाओं में हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष झिरवाल पर विपक्ष ने कड़ा प्रहार करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
जबकि मंत्री नरहरी झिरवाल ने इसे ब्लैकमेल की साजिश बताया है। उनका दावा है कि यह वायरल वीडियो ‘डॉक्टर्ड’ है। जिसे उन्हें बदनाम करने के लिए बनाया गया है।
जानें इस पूरे मामले के मुख्य बिंदु:
नरहरी झिरवाल महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा चेहरा हैं। वे नासिक जिले के डिंडोरी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। वे आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और वर्तमान में राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर कार्यरत हैं। वे अपनी सादगी और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन हालिया विवादों ने उनकी छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें कथित तौर पर नरहरी झिरवाल एक ट्रांसजेंडर के साथ एक कमरे में आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो में मंत्री महोदय और उक्त व्यक्ति को आपत्तिजनक या निजी स्थिति में दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उनके सरकारी आवास का है। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के भाई ने मीडिया को बताया है कि यह व्यक्ति प्रभावशाली लोगों के साथ वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल और उगाही करने का काम करता है। उसने यह भी आरोप लगाया कि वह व्यक्ति MLC पद या ट्रांसजेंडर बोर्ड में उच्च पद की मांग कर रहा था।
नरहरी झिरवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि यह वीडियो ‘डॉक्टर्ड’ (छेड़छाड़ किया हुआ) है और उनकी छवि खराब करने के लिए इसे असेंबल किया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह उस व्यक्ति को पिछले 5 सालों से जानते हैं, लेकिन उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। NCP के अन्य नेताओं (जैसे अमोल मिटकरी) ने इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया है, जिसका उद्देश्य पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है।
विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने इस मामले को नैतिकता से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री से झिरवाल को बर्खास्त करने की मांग की है। हर्षवर्धन सपकाल (कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष) ने इसे महाराष्ट्र की राजनीति का “नैतिक पतन” बताया और कहा कि सार्वजनिक संपत्ति (सरकारी आवास) का दुरुपयोग शर्मनाक है। विपक्ष ने यह भी याद दिलाया कि कुछ महीने पहले उनके कार्यालय के एक क्लर्क को रिश्वत लेते पकड़ा गया था, जिससे उन पर दबाव और बढ़ गया है।