डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Property Card Digital Update: मुंबई शहर के निवासियों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य सरकार ने प्रॉपर्टी कार्ड (मिलकत पत्रिका) में बदलाव की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को विधानसभा में घोषणा की कि अब मुंबई के लगभग 30 लाख संपत्ति धारकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
राजस्व मंत्री ने विधानसभा नियम 47 के तहत जानकारी देते हुए बताया कि मुंबई की भौगोलिक और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण प्रॉपर्टी कार्ड के डिजिटलीकरण में कुछ तकनीकी बाधाएं थीं। इसे दूर करते हुए सरकार ने 45 विभिन्न श्रेणियों के फेरफार (उत्परिवर्तन) के लिए एक विशेष पोर्टल लॉन्च किया है।
इस डिजिटल पहल को राज्य सरकार के ई-गवर्नेस के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आम जनता को पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी।
हस्तांतरण और विरासतः संपत्ति की बिक्री (सेल डीड), वारिस पंजीकरण और उपहार विलेख (गिफ्ट डीड)
वित्तीय लेनदेनः लीज और गिरवी रखना (मॉर्गेज)
सरकारी प्रक्रियाएं: भूमि अधिग्रहण, रोड सेटबैक और आरक्षण संबंधी प्रविष्टियां
पारदर्शिता और गतिः एसएमएस से मिलेगी स्टेटस की जानकारी
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुंबई शहर और उपनगरों की पुरानी व्यवस्था को अब आधुनिक तकनीक से जोड़ दिया गया है। वर्तमान में मुंबई के 19 राजस्व विभागों और 4 नगर नियोजन योजनाओं के तहत आने वाले कुल 27,847 कंप्यूटर जनित प्रॉपर्टी कार्ड नागरिकों के लिए लाइव कर दिए गए हैं।
नागरिक अपनी संपत्तियों से संबंधित किसी भी बदलाव या जानकारी के लिए जिलाधिकारी कार्यालय की निम्नलिखित आधिकारिक वेबसाइट्स mahabhumi.gov.in का उपयोग कर सकते हैं।
अब तक मुंबई में प्रॉपर्टी कार्ड में मामूली बदलाव के लिए भी नागरिकों को महीनों इंतजार करना पड़ता था और बार-बार राजस्व कार्यालय के दरवाजे खटखटाने पड़ते थे। इस नई प्रणाली से न केवल समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि आम मुंबईकर को एक सशक्त, पारदर्शी और सुलभशासन का अनुभव भी मिलेगा।
यह कदम महाराष्ट्र में डिजिटल गवर्नेस को नई ऊंचाई देने वाला मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल दलालों की भूमिका समाप्त होगी, बल्कि दस्तावेजीकरण में होने वाली मानवीय गलतियों की संभावना भी न्यूनतम हो जाएगी। अब मुंबईकर बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी संपत्ति के रिकॉर्ड अपडेट रख सकेंगे।
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भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और सिस्टम को जवाबदेह बनाने के लिए एनआईसी पुणे ने epsit-mumc.mahabhumi.gov.in नामक सॉफ्टवेयर विकसित किया है। रइस प्रणाली के माध्यम से नागरिक न केवल घर बैठे आवेदन कर पाएंगे, बल्कि उनके आवेदन की वर्तमान स्थिति (स्टेटस) क्या है, इसकी जानकारी भी उन्हें सीधे एसएमएस के जरिए मोबाइल पर मिलती रहेगी।
चंद्रशेखर बावनकुले, राजस्व मंत्री