हिरासत में सुरक्षा बढ़ाने के लिए नया नियम, आरोपियों को अब टी-शर्ट और शॉर्ट्स अनिवार्य
Mumbai Police ने हिरासत में आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए लॉक-अप में नया ड्रेस कोड लागू किया है। अब आरोपियों को आधी बांह की टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनाए जाएंगे, साथ ही निगरानी व्यवस्था भी सख्त की गई।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई पुलिस लॉकअप ड्रेस कोड (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Police Lockup Dress Code: हिरासत में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए मुंबई पुलिस ने एक अहम फैसला लिया है। अब लॉक-अप में बंद आरोपियों को लंबे कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होगी।
इसके बजाय उन्हें आधी बांह की टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनाए जाएंगे, ताकि कपड़ों का इस्तेमाल फंदा बनाने के लिए न किया जा सके। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह नया ड्रेस कोड सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। पहले कई मामलों में आरोपियों ने अपने कपड़ों, जैसे फुल स्लीव शर्ट, पैंट या अन्य लंबे वस्त्रों का इस्तेमाल आत्महत्या के प्रयास में किया था।
आरोपियों को आधी बांह की टी-शर्ट, शॉर्ट्स पहनाए जाएंगे
इन घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया कि ऐसे सभी जोखिमपूर्ण कपड़ों पर रोक लगाई जाए। नई व्यवस्था के तहत आरोपियों को मरून रंग की हाफ स्लीव टी-शर्ट और काले रंग के शॉर्ट्स दिए जा रहे हैं। इससे न केवल आत्महत्या के प्रयासों पर रोक लगेगी, बल्कि पुलिस को निगरानी में भी आसानी होगी, सिर्फ ड्रेस कोड में बदलाव ही नहीं, बल्कि लॉक-अप की संरचना और निगरानी प्रणाली में भी सुधार किया जा रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
Mumbai Illegal Schools BMC: बिना मंजूरी चल रहे स्कूलों पर BMC सख्त, पैरेंट्स को किया जा रहा अलर्ट
मुंबई में आप कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, राघव चड्डा के भाजपा में शामिल होने पर विरोध
Raigad Lonere Murder Case: मुख्य आरोपी अनिस मालदार गिरफ्तार, 6 दिन बाद पुलिस की बड़ी सफलता
नागपुर साइबर थान सवालों के घेरे में, बढ़ते ऑनलाइन अपराधों के बीच जांच से ज्यादा ‘वसूली तंत्र’ की चर्चा तेज
ये भी पढ़ें :- Mumbai Illegal Schools BMC: बिना मंजूरी चल रहे स्कूलों पर BMC सख्त, पैरेंट्स को किया जा रहा अलर्ट
बढ़ायी सीसीटीवी कैमरों की संख्या
पुलिस ने बाथरूम के दरवाजों के ऊपरी और निचले हिस्सों को हटाने का फैसला किया है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में हिरासत के दौरान कई मौतें सामने आई हैं, जिनमें आत्महत्या के मामले भी शामिल हैं। इन घटनाओं ने पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
