मुंबई की पूर्व महापौर व शिवसेना यूबीटी नेता किशोरी पेडणेकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
BMC Mayor Reservation Controversy: महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के महापौर पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया के दौरान गुरुवार को मंत्रालय में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। शिवसेना (UBT) नेताओं ने इस प्रक्रिया को पक्षपाती बताते हुए बीच में ही वॉकआउट कर दिया, जिससे आगामी बीएमसी चुनावों की राजनीति गरमा गई है।
मुंबई सहित राज्य के 29 नगर निगमों के लिए महापौर पदों के आरक्षण का निर्धारण करने के लिए गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को नगर विकास विभाग द्वारा लॉटरी आयोजित की गई थी। इस प्रक्रिया के दौरान जैसे ही बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के महापौर पद को ‘सामान्य’ श्रेणी के लिए घोषित किया गया, विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। शिवसेना (UBT) की नेता और पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर धांधली का आरोप लगाते हुए मंत्रालय से वॉकआउट कर दिया।
किशोरी पेडणेकर ने मीडिया से बात करते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण की लॉटरी निकालते समय उन क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के नाम की पर्चियां शामिल ही नहीं की गईं जहां ओबीसी (OBC) समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। पेडणेकर ने कहा, “यह प्रक्रिया पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है और इसे ओबीसी और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को प्रतिनिधित्व से वंचित रखने के लिए जानबूझकर डिजाइन किया गया है”। उन्होंने दावा किया कि यह ड्रॉ एक ‘पूर्व-निर्धारित इरादे’ के साथ निकाला गया था।
#WATCH | Mumbai | Following reservation lottery announcement for mayor post, Shiv Sena (UBT) leader & former mayor, Kishori Pednekar says,” There are many areas where OBC community stays in Mumbai. No chit with names of their representatives was put in the lottery. This is wrong.… pic.twitter.com/HtBViPvsm2 — ANI (@ANI) January 22, 2026
विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बावजूद, आरक्षण की घोषणा ने 28 जनवरी को होने वाले महापौर चुनाव का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इस बार बीएमसी में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। 15 जनवरी को हुए चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटें हासिल की हैं। लगभग 30 वर्षों के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बीएमसी पर अपना वर्चस्व खो दिया है।
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आरक्षण नियमों और रोटेशन नीति के अनुसार, अब यह लगभग तय है कि मुंबई को आगामी कार्यकाल के लिए सामान्य वर्ग की एक महिला महापौर मिलेगी। 28 जनवरी को होने वाले मतदान में नवनिर्वाचित 227 कॉर्पोरेटर हिस्सा लेंगे। जहाँ एक ओर भाजपा और शिंदे गुट (महायुति) अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं, वहीं विपक्षी दल इस आरक्षण प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने की योजना बना रहे हैं। इस विवाद ने बीएमसी की सत्ता की लड़ाई को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।