ST Reservation Lottery:मुंबई महानगरपालिका (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Mayor Election: मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों के बाद महापौर पद को लेकर राजनीतिक समीकरणों में अप्रत्याशित मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि भाजपा-शिवसेना महायुति के पास संख्याबल होने के बावजूद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को महापौर पद मिल सकता है। यह पूरी तरह महापौर पद के आरक्षण के लिए निकाली जाने वाली लॉटरी पर निर्भर करेगा। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि यदि लॉटरी में मुंबई महापौर पद के लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी) या अनुसूचित जनजाति महिला का आरक्षण निकलता है, तो शिवसेना (यूबीटी) का महापौर निर्विरोध चुना जा सकता है।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भाजपा 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। उसके बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट), शिवसेना (शिंदे गुट) 29 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर, कांग्रेस 24 सीटों के साथ चौथे, एआईएमआईएम 8 सीटों के साथ पांचवें और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना 6 सीटों के साथ छठे स्थान पर है। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा महापौर पद पर दावा ठोक रही है, वहीं उसकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) भी इस पद की मांग कर रही है। लेकिन महापौर किस वर्ग से और किस पार्टी का होगा, यह बहुत हद तक आरक्षण लॉटरी पर निर्भर करेगा।
राज्य की 29 महापालिकाओं में महापौर पद के आरक्षण के लिए गुरुवार सुबह 11 बजे नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाल की अध्यक्षता में मंत्रालय की छठी मंजिल स्थित परिषद सभागृह में लॉटरी निकाली जाएगी। यदि मुंबई का महापौर पद अनुसूचित जनजाति या अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित होता है, तो भाजपा-शिवसेना महायुति के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। इसका कारण यह है कि शिवसेना (यूबीटी) को छोड़कर किसी भी अन्य दल के पास एसटी वर्ग से निर्वाचित नगरसेवक नहीं है।
महापालिका चुनाव में प्रभाग क्रमांक 53 और 121 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थे। प्रभाग 53 से जितेंद्र वलवी ने शिवसेना (शिंदे गुट) के अशोक खांडवे को पराजित किया, जबकि प्रभाग 121 से प्रियदर्शनी ठाकरे ने शिंदे गुट की प्रतिमा खोपड़े को हराया। इसके अलावा खुले प्रभागों से भी महायुति का कोई एसटी उम्मीदवार विजयी नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में ठाकरे गुट का एसटी उम्मीदवार निर्विरोध महापौर बन सकता है।
मुंबई महानगरपालिका में पिछले 25 वर्षों से महापौर पद पर शिवसेना का कब्जा रहा है। पिछली बार महापौर पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित था, तब शिवसेना की किशोरी पेडणेकर महापौर बनी थीं। वर्ष 2026 बालासाहेब ठाकरे का जन्मशताब्दी वर्ष होने के कारण उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि इस बार भी महापौर उनकी पार्टी का ही बने। दो दिन पहले मातोश्री में शिवसैनिकों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा था, “अगर भगवान की इच्छा होगी, तो महापौर हमारा ही होगा।” अब यह देखना होगा कि 22 जनवरी को लॉटरी किस दिशा में जाती है।
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