
मुंबई लोकल ट्रेन (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai Local Train CCTV: मालाड लोकल हत्याकांड के बाद मुंबई की लोकल ट्रेनों में सुरक्षा को लेकर रेलवे ने तैयारी की रफ्तार बढ़ा दी है। अब तक प्राथमिकता सिर्फ महिलाओं के डिब्बों में सीसीटीवी और टॉकबैक सिस्टम को दी जा रही थी, लेकिन हालिया घटना के बाद सामान्य फर्स्ट और जनरल कोच भी सीधे निगरानी के दायरे में लाने की जरूरत आ पड़ी है। इस सुरक्षा कवच का सबसे बड़ा असर ट्रेन क्रू मोटरमैन, गार्ड और ट्रेन मैनेजर पर पड़ेगा, जो अब हर सफर में तकनीक के साथ जिम्मेदारी निभाएंगे।
वेस्टर्न रेलवे ने उपनगरीय लोकल ट्रेनों के 1500 कोचों में 12 हजार से अधिक हाई-एंड सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। करीब 97 करोड़ रुपये की इस परियोजना में सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमिशनिंग का काम शुरू हो चुका है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, मालाड की घटना भले ही एक अपवाद रही हो, लेकिन इसके बाद ट्रेन और स्टेशन दोनों स्तर पर निगरानी को और मजबूत करने का फैसला लिया गया है। योजना के तहत ईएमयू और मेमू लोकल ट्रेनों में 12,006 डोम और वेज टाइप कैमरे लगाए जाएंगे।
ईएमयू और मेमू लोकल ट्रेनों में लगे डोम और वेज टाइप कैमरे सिर्फ रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि फेस रिकग्निशन और वीडियो एनालिटिक्स से लैस होंगे। इससे कोच के अंदर भीड़ की स्थिति, किसी भी तरह की झड़प या संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी। इसका फायदा सीधे ट्रेन क्रू को मिलेगा, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम और सुरक्षा बलों को अलर्ट कर सकेंगे।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में हुई आंतरिक बैठक में सुरक्षा तंत्र की समीक्षा की गई। इसके बाद दिसंबर के अंत में दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। ठेका आवंटित होने के बाद 10 महीनों के भीतर सभी कोचों में कैमरे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, पूरे वेस्टर्न रेलवे नेटवर्क पर 4000 अतिरिक्त आरपीएफ कर्मियों की तैनाती की भी योजना है, जिससे ऑन-ग्राउंड सुरक्षा और मजबूत होगी।
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ये कैमरे 123 किलोमीटर लंबे चर्चगेट-दहानू उपनगरीय कॉरिडोर पर चलने वाली सभी एसी और नॉन-एसी लोकल ट्रेनों के हर कोच को कवर करेंगे, मोटरमैन के केबिन और ट्रेन मैनेजर की गतिविधियां भी निगरानी में रहेंगी, जिससे ऑपरेशनल पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अलावा, टर्मिनस स्टेशनों पर खराब पड़े बैगेज स्कैनर हटाकर नए आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे।
फिलहाल उपनगरीय स्टेशनों पर 3000 से अधिक सीसीटीवी पहले से लगे हैं, जिनमें 470 से ज्यादा फेस रिकग्निशन सिस्टम से जुड़े हैं। लोकल के लाखों यात्रियों के बीच, अब ट्रेन कू सिर्फ संचालन ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की पहली कड़ी बनते जा रहे हैं।






