मामूली विवाद में मर्डर: Mumbai Local Train में प्रोफेसर की हत्या, 247 पन्नों की चार्जशीट दाखिल
Mumbai Local Train में प्रोफेसर की हत्या के मामले में जीआरपी ने तेजी दिखाते हुए 247 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। आधुनिक तकनीक और फोरेंसिक साक्ष्यों से केस को मजबूत किया गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
नवी मुंबई एजुसिटी प्रोजेक्ट अपडेट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Mumbai Local Train Murder: मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में हुई एक दर्दनाक हत्या के मामले में बोरीवली गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने कार्यकुशलता की एक नई मिसाल पेश की है।
24 जनवरी को विले पार्ले स्थित एनएम कॉलेज के 33 वर्षीय प्रोफेसर आलोक सिंह की हत्या के मामले में जीआरपी ने 247 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है।
यह त्वरित कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था में भरोसे को जगाती है। बल्कि अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है। घटना उस वक्त हुई जब आलोक सिंह शाम की भीड़भाड़ वाली चर्चगेट-बोरीवली स्लो लोकल के जनरल डिब्बे में सफर कर रहे थे।
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Mumbai Local Train में चाकू से किया था हमला
मालाड स्टेशन के पास रास्ता देने जैसी मामूली बात पर हुई कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया और आरोपी ओमकार शिंदे ने प्रोफेसर पर चाकू से हमला कर दिया था। इस हमले में अत्यधिक खून बहने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया था।
इस केस को सुलझाने में पुलिस ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक जांच का बेहतरीन तालमेल दिखाया। चश्मदीदों की कमी को दूर करने के लिए पुलिस ने रेलवे सुरक्षा बल के ‘फेशियल रिकग्निशन ऐप’ का इस्तेमाल किया। चार्जशीट में कुल 63 गवाहों के बयान दर्ज हैं, जिनमें से चार प्रत्यक्षदर्शी हैं। प्रोफेसर के सहकर्मी सुधीरकुमार त्रिवेदी ने भी मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया है।
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फोरेंसिक रिपोर्ट ने जांच को किया पुख्ता
पुलिस की जांच को फोरेंसिक रिपोर्ट ने और भी पुख्ता कर दिया है। आरोपी के घर से बरामद हथियार और कपड़ों पर मिले खून के निशान प्रोफेसर आलोक सिंह के ब्लड ग्रुप से मेल खा गए हैं। बोरीवली जीआरपी की इस मुस्तैदी ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि, पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में देरी न हो। भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भले ही सवाल उठते रहे हों। लेकिन पुलिस की इस बिजली जैसी फुर्ती ने अपराधियों के मन में खौफ जरूर पैदा कर दिया है।
