Mumbai suburban railway safety (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Suburban Railway Safety: देश की आर्थिक राजधानी की लाइफलाइन कही जाने वाली मुंबई लोकल में नए युग की शुरुआत होने जा रही है। देश में ऑटोमेटिक बंद दरवाजे की पहली लोकल तैयार हो चुकी है। बताया गया कि 268201-268212 नंबर वाली 12 डिब्बों की यह ट्रेन अपनी तरह की पहली नॉन-एसी ट्रेन है। स्वचालित स्लाइडिंग दरवाजों से लैस इस ट्रेन को मुंबई की भारी भीड़ वाले उपनगरीय मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई है।
नवनिर्मित ट्रेन चेन्नई के पेरम्बूर स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री से बनकर तैयार हुई है। इसे रेनिगुंटा होते हुए मुंबई लाया जा रहा है। यह पहली ट्रेन मध्य रेलवे को मिली है।
इस रेक को कुर्ला के कारशेड में लाया जाएगा। उसके बाद मध्य रेल की नॉन एसी ट्रेन के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
मुंबई में यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद जरूरी है कि मुंबई में चलने वाली सभी लोकल ट्रेनों के दरवाजे बंद हों। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार मुंबई को अपनी पहली नॉन-एसी, बंद दरवाजों वाली लोकल ट्रेन मिली है, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। उल्लेखनीय है कि जून 2025 में मुंब्रा में भीड़ भरी लोकल के दरवाजे से कई यात्रियों के गिरने के बाद रेल मंत्री ने कहा कि अब मुंबई के लिए बनने वाली सभी लोकल बंद दरवाजे वाली होगी।
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई ने रेलवे बोर्ड के साथ मिलकर इस ट्रेन को डिजाइन किया है। यह एक वेस्टिब्यूल ट्रेन है, जिसमें छह-छह डिब्बों की दो यूनिट हैं। यात्री एक डिब्बे से दूसरे में आसानी से गुजर सकते हैं, ठीक पुरानी एसी ट्रेनों की तरह। महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बे दोनों तरफ हो सकते हैं, लेकिन कोई फर्स्ट क्लास नहीं है। मुंबई की नॉन एसी लोकल मेंवेंटिलेशन सबसे बड़ी चुनौती थी। नॉन-एसी ट्रेनों में बंद दरवाजों से हवा का बहाव रुकने का डर था। इस समस्या को हल करने के लिए ट्रेन में जबरदस्त वेंटिलेशन यूनिट्स लगाई गई हैं।
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छत पर ब्लोअर्स लगे हैं, जो लगातार ताजी हवा को कोच में भेजते हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रेन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बारिश का पानी अंदर न आए, जैसा पुरानी सिमेंस ट्रेनों में होता था। पीक आवर में भारी भीड़ को ध्यान में रखकर ड्राइवर केबिन से जुड़े ऑटोमैटिक दरवाजे बंद करने का सिस्टम, सेंसर्स, टॉकबैक, यात्री सूचना डिस्प्ले और बेहतर वेंटिलेशन दिए गए हैं। इससे कार्बन डाइऑक्साइड जमा नहीं होगी और यात्री ट्रेन से गिरने से सुरक्षित रहेंगे।
सेंट्रल रेलवे सोलापुर डिवीजन के वाडी स्टेशन पर आधिकारिक तौर पर इस रैक को प्राप्त करेगा, जिसके बाद इसे आगे की प्रक्रियाओं और अंततः तैनाती के लिए कुर्ला के कारशेड में ले जाया जाएगा। इसे पैसेंजर सर्विस में लाने से पहले ट्रायल जरूरी हैं। RDSO द्वारा हाई-स्पीड (110 किमी/घंटा) कन्फर्मेटरी ऑसिलोग्राफ कार रन (COCR) ट्रायल होगा, जिसमें सेंसर्स से स्पीड और राइडिंग क्वालिटी जांचे जाएंगे। उसके बाद पैसेंजर ट्रायल में वजन के बराबर बोरे रखकर सुरक्षा परीक्षण होगा। पूरी प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।