मुंबई में मानसून से पहले नाला सफाई पर घमासान, भाजपा नेताओं ने लगाए भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप
Mumbai Drain Cleaning News: मुंबई में मानसून से पहले नाला सफाई की धीमी रफ्तार को लेकर विवाद गहरा गया है। जोन-5 में केवल 20 प्रतिशत काम पूरा होने पर भाजपा नेताओं ने बीएमसी प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई ड्रेन क्लीनिंग विवाद ( सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Drain Cleaning Work Delay: मानसून सिर पर आने के बावजूद मुंबई में नाला-सफाई की रफ्तार बेहद सुस्त नजर आ रही है। मुंबई भाजपा अध्यक्ष और विधायक अमित साटम की तरफ से किए गए निरीक्षण में पूर्वी उपनगरों के जोन 5 में केवल 20 प्रतिशत नाला-सफाई होने की चौंकाने वाली बात सामने आई है।
साटम ने मंगलवार को पूर्वी उपनगरों में नाला सफाई कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जोन-6 में जहां लगभग 55 प्रतिशत नाला सफाई का काम पूरा हो चुका है, वहीं जोन-5 में केवल 20 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है, जो बेहद चिंताजनक है।
निरीक्षण के दौरान विधायक अमीत साटम ने स्पष्ट शब्दों में बीएमसी अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नालों की सफाई पूरी नहीं हुई तो बारिश के दौरान जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। साटम ने बताया कि अगले 8 से 10 दिनों में जोन-5 का फिर से दौरा कर प्रगति की समीक्षा की जाएगी। बता दें कि जोन 5 के अंतर्गत कुर्ला, चेम्बूर व माहुल जैसे इलाके शामिल हैं।
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नालों के किनारे अवैध निर्माण की भरमार
स्टैंडिंग कमिटी में बीजेपी गुट नेता गणेश खणकर ने प्रशासन से पूछा कि, “80 प्रतिशत नाला अचानक 20 प्रतिशत पर कैसे आ गया? नाला-सफाई के बाद फिर प्लास्टिक नालों में कैसे पहुंचता है और मलबा आता कहां से है?
उन्होंने पारदर्शिता के लिए नाला-सफाई की सैटेलाइट इमेज जारी करने की मांग की, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। अगर पहले ही 10 प्रतिशत काम किया गया था, तो यह मलबा कहां से आया? उषा नगर में नाले के किनारे झोपड़ियां खड़ी हो गई हैं। झोपड़ियां बनने तक बीएमसी अधिकारी क्या करते रहते हैं?
क्या हम भी इसमें सहभागी बनें? उन्होंने कहा कि नालों के किनारे कितने निर्माण खड़े हो रहे हैं। इसे रोका जाना चाहिए, दूसरी ओर, एमआईएम के जमीर कुरैशी ने नाला-सफाई प्रक्रिया में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि ठेकेदार ट्रकों का वजन बढ़ाने के लिए बाहर से मिट्टी लाकर कचरे में मिलाते हैं और डंपिंग ग्राउंड पर भी वजन में भ्रष्टाचार होता है। पूर्व महापौर श्रद्धा जाधव ने भी सवाल उठाया कि नाला-सफाई की प्रतिशतता आखिर तय कैसे की जाती है। उन्होंने मीठी नदी पर बिना सूचना के “सरप्राइज विजिट” करने की मांग की।
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लापरवाह ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग
- इसी विवाद के बीच स्टैंडिंग कमिटी के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने जोन 5 के कामकाज पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नाला-सफाई के दौरान सीसीटीवी लगाने की शर्त थी, लेकिन यह व्यवस्था प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही है।
- साथ ही, उन्होंने लापरवाह ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की। प्रीति साटम ने भी वालभट नदी में जमा हो रहे मलबे और अवैध निर्माणों पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि ठेकेदारों ने समय पर काम नहीं किया, तो मुंबईकरों को खुद नालों में उत्तरना पड़ेगा।
- अशरफ आजमी ने पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से प्रशासन भाजपा के प्रभाव में चल रहा था, फिर अवैध निर्माण कैसे हुए? उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर आंकड़े पेश कर रहे हैं और पूरे मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।
- कुल मिलाकर, विधायक अमित साटम प्रशासन पर जॉन 5 में केवल 20 प्रतिशत काम होने की जिम्मेदारी डाल रहे है, लेकिन उनकी ही पार्टी के नेताओं द्वारा उठाए गए भ्रष्टाचार और लापरवाही के सवालों ने नालेसफाई अभियान पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
