'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए लोग...', अमीत साटम का रोहित पवार पर पलटवार, बताई 25 वाहनों के काफिले की सच्चाई

BJP Convoy Controversy: मुंबई में नालेसफाई के निरीक्षण को लेकर रोहित पवार व अमीत साटम के बीच जंग छिड़ गई है। रोहित ने 25 गाड़ियों के काफिले पर सवाल उठाए, तो साटम ने संघर्ष हवाला देकर पलटवार किया।
"Those born with a silver spoon in their mouths should not preach" Satam attacks Rohit Pawar; find out why a war has erupted over Mumbai's drain-cleaning operations.
रोहित पवार Vs अमीत साटम (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Rohit Pawar vs Ameet Satam: रोहित पवार ने सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाया कि जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार देशवासियों से इंधन बचाने और देश की संपत्ति की रक्षा करने की अपील कर रहे हैं, तो उनकी ही पार्टी के नेता मुंबई की तंग गलियों में 25 गाड़ियों का काफिला लेकर क्यों घूम रहे हैं? रोहित पवार ने मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमीत साटम के काफिले का एक वीडियाे शेयर करते हुए उन पर तंज कसा है। अब इस पर अमीत साटम ने करारा जवाब दिया है।

रोहित पवार का साटम पर तंज

रोहित पवार ने तंज कसते हुए कहा, नालेसफाई का निरीक्षण करने के लिए तकनीकी दृष्टि और कुछ चुनिंदा अधिकारियों की जरूरत होती है। फिर यह 25 गाड़ियों का काफिला किसके लिए है? कड़क धूप और ट्रैफिक में फंसा आम मुंबईकर जब नेताओं की इन गाड़ियों की कतारें देखता है, तो उसे कैसा महसूस होता होगा? यह काम का निरीक्षण कम और शक्ति प्रदर्शन ज्यादा लगता है।

चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए लोग हमें सीख न दें: साटम

रोहित पवार के इन आरोपों पर भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमीत साटम ने भी कड़ा रुख अपनाया और उन पर निजी हमला करने से भी गुरेज नहीं किया। साटम ने रोहित पवार के दावों को हास्यास्पद और झूठा करार दिया।

अमीत साटम ने स्पष्ट किया कि सड़क पर चल रहे हर वाहन को उनके काफिले का हिस्सा बताना पूरी तरह से गलत और ओछी राजनीति है। उन्होंने कहा, आज मुंबई शहर में नालेसफाई का आधिकारिक निरीक्षण चल रहा था। इस दौरे में पालकमंत्री, विधायक, सदन के नेता, स्थायी समिति के अध्यक्ष, नगरसेवक और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। काफिले में निश्चित रूप से 7-8 गाड़ियां थीं, लेकिन सड़क के सभी वाहनों को हमारे साथ दिखाकर 25 गाड़ियों के काफिले का भ्रम फैलाना आपकी फितरत है।

अमीत साटम ने रोहित पवार के पारिवारिक बैकग्राउंड पर निशाना साधते हुए आगे कहा, हम एक साधारण मध्यमवर्गीय मराठी परिवार से आकर मुंबई की सेवा कर रहे हैं। मैं 21 साल की उम्र में बारामती एग्रो जैसी कंपनी का CEO नहीं बन गया था, मैं यहां तक संघर्ष करके पहुंचा हूं। इसलिए, जो लोग मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, उन्हें हमें उपदेश देने की कतई आवश्यकता नहीं है।

जनता के बीच चर्चा का विषय

इस जुबानी जंग ने मुंबई की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। जहाँ एक ओर विपक्ष इसे फिजूलखर्ची और दिखावा बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे शहर की सुरक्षा के लिए जरूरी प्रशासनिक दौरा करार दे रहा है। लेकिन इस बहस के बीच आम मुंबईकर यही उम्मीद कर रहा है कि चाहे गाड़ियों का काफिला 7 का हो या 25 का, मानसून में उसकी गलियों में पानी नहीं भरना चाहिए।

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