

BMC BJP Shinde Group Conflict News: बीएमसी में बीजेपी व शिंदे गुट के बीच चल रहा 'अंदरूनी संघर्ष' अब खुलकर सामने आने लगा है। पिछले दो दिनों से महापौर रितु तावड़े की तरफ से किए जा रहे नाला सफाई निरीक्षण दौरों से उपमहापौर को दूर रखे जाने पर नाराजगी बढ़ गई है।
"सहयोगी दल होने के बावजूद हमें साधारण सूचना देने की शिष्टता भी महापौर ने नहीं दिखाई," ऐसे तीखे शब्दों में उपमहापौर संजय घाड़ी ने महापौर रितु तावड़े की कार्यशैली पर निशाना साधा है।
बीएमसी मुख्यालय स्थित शिवसेना कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमहापौर संजय घाड़ी और गटनेता अमेय घोले ने महापौर की 'एकला चलो' नीति की कड़ी आलोचना की।
मुंबई में नाला सफाई की समीक्षा के लिए महापौर रितु तावड़े ने दौरे तय किए, लेकिन इन दौरों का निमंत्रण तक उपमहापौर को नहीं दिया गया। "निमंत्रण नहीं मिला, इसलिए मैं खुद दौरे पर नहीं गया," ऐसा कहते हुए घाड़ी ने अप्रत्यक्ष रूप से महापौर पर हमला बोला। इससे भाजपा और शिवसेना के बीच इस खींचतान से मनपा में समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। घाड़ी ने कहा कि समन्वय बनाकर काम किया जाना चाहिए। बता दें कि इसके पहले मुंबई क्लीन लीग में अक्षय कुमार जब बीएमसी आए थे तो उस समय भी शिंदे गुट के अमेय घोले ने आरोप लगाया था कि उप महापौर को फोटो सेशन व बैठक के दौरान साइड लाइन किया गया है।
नाला सफाई कार्य पर बोलते हुए धाड़ी ने कहा कि अब तक शहर में 41 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और 31 मई तक 80 प्रतिशत गाद निकालने का लक्ष्य प्रशासन को दिया गया है। उन्होंने कहा कि कुर्ला जैसे इलाकों में नालों से थर्माकोल, प्लास्टिक और पुराने फर्नीचर तक निकल रहे है, जो बेहद चिंताजनक है। नागरिकों को नालों में कचरा न फेंकने के लिए जागरूक किया जाएगा और अधिक से अधिक गाद निकालने पर जोर दिया जाएगा। मुझे इस विषय पर किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं है। मैं जल्द ही इस विषय पर चर्चा कर इसे सुलझाने की कोशिश करूंगा। - गणेश खणकर (बीएमसी सदन नेता, बीजेपी)
वाकोला में मछली बिक्री को लेकर अफवाहों पर भी उन्होंने कहा कि मछली काटकर बेचने या बदबू न आने देने को लेकर मनपा ने कोई तुगलकी आदेश जारी नहीं किया है। कोई अधिकारी जबरदस्ती ऐसे नियम लागू कर रहा है, तो कार्रवाई की जानी चाहिए।
उपमहापौर ने मराठी अस्मिता के मुद्दे पर भी प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि मुंबई में अब भी 520 दुकानों पर मराठी नाम पट्टियां नहीं लगी हैं। कानून का पालन न करने वाले दुकानदारों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, उन्होंने कहा, "मराठी भाषा को प्राथमिकता देना हर व्यापारी की जिम्मेदारी है।