MVA में दरार? अंबादास दानवे के नाम पर कांग्रेस का विरोध, हर्षवर्धन सपकाल ने किया स्वतंत्र उम्मीदवार का दावा
Harshvardhan Sapkal on Ambadas Danve: शिवसेना (UBT) द्वारा अंबादास दानवे के नाम के ऐलान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने अलग उम्मीदवार उतारने का दावा किया।
- Written By: अनिल सिंह
अंबादास दानवे के नाम पर कांग्रेस का विरोध, हर्षवर्धन सपकाल ने किया स्वतंत्र उम्मीदवार का दावा (फोटो क्रेडिट-X)
Harshvardhan Sapkal on Ambadas Danve MLC MVA Candidate: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर महाविकास आघाडी (MVA) के भीतर सीटों के तालमेल को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। आगामी विधान परिषद चुनाव के लिए जैसे ही शिवसेना (UBT) ने अंबादास दानवे के नाम का औपचारिक ऐलान किया, कांग्रेस ने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी इस चुनाव में अपना स्वतंत्र उम्मीदवार मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन के प्रमुख घटक दल एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे।
यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब सपकाल के पुराने बयान को याद किया गया। उन्होंने पूर्व में संकेत दिया था कि यदि उद्धव ठाकरे स्वयं विधान परिषद के लिए उम्मीदवार बनते हैं, तो कांग्रेस बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए उनका समर्थन करेगी। हालांकि, अंबादास दानवे के नाम पर कांग्रेस का कहना है कि विधानसभा में उनके विधायकों की संख्या को देखते हुए एक सीट पर उनका दावा मजबूत है और गठबंधन में एकतरफा फैसले नहीं लिए जाने चाहिए।
विधान परिषद के लिए जटिल चुनावी प्रक्रिया
महाराष्ट्र विधान परिषद एक स्थायी सदन है, जहाँ सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है। वर्तमान में विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों (MLAs) द्वारा चुने जाने वाले कोटे की सीटों पर चुनाव हो रहा है। इस प्रक्रिया में एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसमें प्रत्येक विधायक को वरीयता के आधार पर वोट देना होता है। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में ‘कोटा’ यानी प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है। कांग्रेस का मानना है कि उनके पास अपने दम पर एक उम्मीदवार जिताने के लिए पर्याप्त वोट मौजूद हैं।
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9 सीटों का गणित और गठबंधन के समीकरण
वर्तमान चुनाव विधान परिषद की 9 रिक्त सीटों के लिए हो रहा है। विधानसभा में वर्तमान दलीय स्थिति के अनुसार, सत्ताधारी महायुति (भाजपा, शिवसेना-शिंदे और एनसीपी-अजित पवार) के पास संख्या बल अधिक है, जिससे वे 5 से 6 सीटें आसानी से जीत सकते हैं। बाकी बची 3 सीटों के लिए महाविकास आघाडी के बीच मुकाबला है। सीटों के समीकरणों को देखें तो शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) को एकजुट रहना अनिवार्य है, अन्यथा वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा सत्ता पक्ष को मिल सकता है।
सीटों का समीकरण और दलीय स्थिति
वर्तमान विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर सीटों का अनुमानित बंटवारा इस प्रकार है:
| राजनीतिक दल/गठबंधन | संभावित सीटें |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 4 सीटें (+1 उपचुनाव सीट) |
| शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) | 2 सीटें |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – अजीत पवार गुट) | 2 सीटें |
| महाविकास अघाड़ी (MVA) | 1 सीट |
जिन 9 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT)
- नीलम गोऱ्हे (शिवसेना – शिंदे गुट)
- अमोल मिटकरी (NCP)
- शशिकांत शिंदे (NCP – शरद पवार गुट)
- राजेश राठौड़ (कांग्रेस)
- रणजीतसिंह मोहित पाटिल (BJP)
- संजय केणेकर (BJP)
- संदीप जोशी (BJP)
- दादाराव केचे (BJP)
मतभेदों का भविष्य की राजनीति पर असर
हर्षवर्धन सपकाल के इस दावे ने महाविकास आघाडी की एकता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि कांग्रेस और शिवसेना (UBT) अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं, तो इसे ‘दोस्ताना संघर्ष’ कहा जा सकता है, लेकिन इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों के गठबंधन पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, एनसीपी (शरद पवार गुट) इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, ताकि विपक्षी मतों का बिखराव रोका जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले 24 घंटों में होने वाली दिल्ली और मुंबई की बैठकें यह तय करेंगी कि MVA एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी या कांग्रेस अपने स्टैंड पर अडिग रहेगी।
