महिलाओं और बच्चों की योजनाओं में कटौती? 1.40 करोड़ के चुनावी निविदा पर उठा सवाल
MBMC Tender Scam: MBMC के महिला एवं बाल कल्याण विभाग की 1.40 करोड़ की चुनावी निविदा पर सवाल। एड. कृष्णा गुप्ता ने महिलाओं और बच्चों की योजनाओं में फंड कटौती व टेंडर स्कैम की आशंका जताई।
- Written By: आंचल लोखंडे
महिलाओं और बच्चों की योजनाओं में कटौती?
Meera-Bhayander: मीरा- भाईंदर मनपा (MBMC) के महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा जारी 1.40 करोड़ रुपए की चुनाव-संबंधी निविदा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
एड. कृष्णा गुप्ता ने आरोप लगाया है कि यह राशि मूल रूप से महिलाओं और बच्चों की कल्याणकारी योजनाओं के लिए तय थी, जिसे चुनावी व्यवस्थाओं पर खर्च किया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर मनपा आयुक्त व प्रशासक राधाबिनोद शर्मा और मुख्य लेखा परीक्षक को लिखित शिकायत देकर इसकी तत्काल जांच की मांग की है।
चुनाव की चाय-नाश्ता व्यवस्था महिला-बाल निधि से?
बता दें कि मनपा चुनाव 2025 की तैयारियों के लिए अलग-अलग विभागों ने अपनी-अपनी जरूरतों के अनुसार निविदाएँ जारी की हैं। जिसमें महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से चाय, कॉफी, नाश्ता और भोजन कंटेनर की सप्लाई के लिए 1.40 करोड़ रुपए की भारी निविदा जारी होना कई सवाल खड़े करता है। एड। गुप्ता के अनुसार यह विभाग महिलाओं और बच्चों की योजनाओं के लिए बनाया गया है, और चुनावी कार्य इससे बिल्कुल अलग विषय है।
सम्बंधित ख़बरें
मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार, 27 वें वार्षिक दिवस पर MRVC ने साझा किया पुरा रोडमैप
ट्रैक किनारे निर्माण को लेकर मध्य रेलवे सख्त, 30 मीटर के अंदर कंस्ट्रक्शन के लिए लेनी होगी NOC
जोगेश्वरी जंक्शन, नई हार्बर लाइन और 15 डिब्बों वाली लोकल से बदलेगी मुंबई की रेल व्यवस्था
मुंबई: एसटी महामंडल के भूमि विकास को मिलेगी गति, पीपीपी नीति से छूट देने को मंत्रिमंडल की मंजूरी
एड. गुप्ता ने जताई टेंडर स्कैम की आशंका
एड. गुप्ता ने दावा किया कि महिला व बाल कल्याण विभाग की निधि पोषण कार्यक्रम, सुरक्षा योजनाएँ, स्वास्थ्य सेवाएँ, सहायता योजनाएँ, और महिला तथा बच्चों के कल्याण के लिए होती है। उन्होंने कहा कि अगर यह रकम चुनाव में खर्च की जा रही है, तो यह निधि के उद्देश्य का उल्लंघन है और इससे भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
प्रशासन से मांगे गए महत्वपूर्ण जवाब
शिकायत में मनपा से कई मुद्दों पर स्पष्टता मांगी गई है। जिसमें क्या इस निधि को चुनावी खर्च में इस्तेमाल करने की कोई वैध मंजूरी है? क्या किसी अधिकृत अधिकारी ने लिखित रूप से धन के पुनर्विनियोजन की अनुमति दी? किस नियम- कानून के तहत महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने चुनाव से जुड़ी निविदा जारी की? क्या चुनाव विभाग ने इस राशि की मांग की थी? 1।40 करोड़ की इस निविदा का तत्काल वित्तीय ऑडिट किया जाए। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए,ऐसे 6 मुद्दों का समावेश है।
ये भी पढ़े: पटोले साबित करेंगे कि वही हैं ‘नाना’? साकोली में प्रतिष्ठा, प्रतिमा और प्रभाव की बड़ी परीक्षा
आरटीआई कार्यकर्ता एड. कृष्णा गुप्ता ने कहा कि यह मुद्दा सीधे जनता और योजनाओं पर असर डालता है।यदि धन का उपयोग गलत तरीके से किया गया है, तो इससे महिलाओं और बच्चों के लिए चल रही योजनाओं को नुकसान होगा। यह मामला सार्वजनिक हित और पारदर्शिता से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए
