सोनम वांगचुक की रिहाई पर मजीद मेमन के कड़े सवाल: ‘NSA लगाया ही क्यों था, क्या सबूत हवा में उड़ गए?’
Majeed Memon Sonam Wangchuk NSA: वरिष्ठ वकील मजीद मेमन ने सोनम वांगचुक पर एनएसए हटाने को लेकर सरकार से सबूत मांगे हैं। उन्होंने भाजपा पर बंगाल चुनाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
- Written By: अनिल सिंह
Majeed Memon Sonam Wangchuk NSA (फोटो क्रेडिट-X)
Majeed Memon on BJP West Bengal Election: लद्दाख के पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को गृह मंत्रालय द्वारा वापस लिए जाने के फैसले पर राजनीति गरमा गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सांसद मजीद मेमन ने सरकार की इस कार्रवाई पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा थे, तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्हें रिहा करना पड़ा? मेमन ने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाजों को दबाने के लिए कड़े कानूनों का दुरुपयोग कर रही है और बिना किसी ठोस सबूत के लोगों को हिरासत में ले रही है।
टीएमसी नेता मजीद मेमन ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली यह संकेत दे रही है कि वह किसी भी तरह से विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं को डराना चाहती है। वांगचुक की हिरासत और फिर उनकी अचानक रिहाई ने कानूनी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
Mumbai, Maharashtra: On the Home Ministry revoking the detention of activist Sonam Wangchuk under the NSA, Senior Advocate and former MP Majeed Memon says, “If any social activist or opponent says something that the government is unhappy about, you impose a detention law on them,… pic.twitter.com/fePBtfusDr — IANS (@ians_india) March 15, 2026
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“सबूत हवा में गायब हो गए या थे ही नहीं?”
मजीद मेमन ने आईएएनएस से बातचीत में सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सोनम वांगचुक की हिरासत किस आधार पर की गई थी? उन्होंने कहा, “यदि कोई सामाजिक कार्यकर्ता ऐसी बात कहता है जिससे सरकार नाखुश होती है, तो आप उन पर एनएसए लगा देते हैं। इसमें बिना सुनवाई के हिरासत में रखा जाता है। अब जब सरकार ने इसे वापस ले लिया है, तो क्या वे सबूत हवा में गायब हो गए? क्या अचानक परिस्थितियां बदल गईं?” मेमन ने तर्क दिया कि यह कदम केवल राजनीतिक दबाव या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली बदनामी से बचने के लिए उठाया गया लगता है।
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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों पर भाजपा का ‘कब्जा’ मिशन
मेमन ने केवल वांगचुक के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पश्चिम बंगाल में डेरा डाले हुए हैं और ममता दीदी की सरकार को गिराने की बात कर रहे हैं। मेमन के अनुसार, संदेश साफ है कि भाजपा चाहे सही हो या गलत, किसी भी तरह से चुनाव जीतना चाहती है। उन्होंने आशंका जताई कि चुनाव जीतने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और यहां तक कि चुनाव आयोग का भी दुरुपयोग किया जा सकता है।
‘भगवा रंग’ और क्षेत्रीय दलों की स्वायत्तता का संकट
मजीद मेमन ने भाजपा के ‘भगवाकरण’ के एजेंडे पर प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी का सपना पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों पर कब्जा करना है। उन्होंने कहा, “भाजपा का मानना है कि उन्होंने अधिकांश राज्यों को अपने पाले में कर लिया है और अब वे शेष राज्यों को भी अपने अधीन लाना चाहते हैं।” मेमन के अनुसार, क्षेत्रीय दलों और उनके नेतृत्व को निशाना बनाना संघीय ढांचे के लिए खतरनाक है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता सब देख रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग चुनाव परिणामों में भारी पड़ सकता है।
