चार धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक पर भड़के TMC नेता, माजीद मेमन बोले- अदालत में...

Char Dham Entry Ban: चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन के फैसले को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। TMC नेता माजीद मेमन ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा यह फैसला अदालत में टिक नहीं पाएगा।
Char Dham Temple Entry Non Hindu Entry Ban Majid Memon Statement
टीएमसी नेता माजिद मेमन (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Majid Memon Statement: उत्तराखंड के चार धामों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश वर्जित करने के फैसले ने देश में एक नई सियासी और कानूनी बहस को जन्म दे दिया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के इस कड़े रुख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ वकील और टीएमसी नेता माजीद मेमन ने इसे अधिकारों का हनन बताया है।

संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन: माजीद मेमन का तर्क

महाराष्ट्र के तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता माजीद मेमन ने इस विवाद पर अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि राज्य सरकार या कोई मंदिर समिति ऐसा नियम बनाती है जो सीधे तौर पर संवैधानिक गरिमा से टकराता है, तो उसकी उम्र ज्यादा नहीं होगी। माजीद मेमन के अनुसार, "केवल धार्मिक पहचान के आधार पर सार्वजनिक महत्व के स्थलों पर रोक लगाना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण है। यदि यह मामला अदालत की दहलीज तक पहुँचता है, तो न्यायपालिका इस तरह के प्रतिबंधों को रद्द कर सकती है, क्योंकि इसके लिए कोई ठोस कानूनी आधार मौजूद नहीं है।"

क्या है बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का फैसला?

आपको बता दें कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने हाल ही में घोषणा की है कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में अब केवल हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने साफ किया कि बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे पावन धामों की पवित्रता और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। यह प्रस्तावित पाबंदी उन सभी मंदिरों पर लागू होगी जो समिति द्वारा संचालित किए जाते हैं।

हरिद्वार से शुरू हुआ विवाद अब चार धाम तक

यह विवाद तब और गहरा गया जब इस महीने की शुरुआत में हरिद्वार की प्रसिद्ध 'हर की पौड़ी' पर कुछ पोस्टर देखे गए। इन पोस्टरों में स्पष्ट लिखा था कि यह 'हिंदू क्षेत्र' है और यहाँ गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। अब चार धाम यात्रा से ठीक पहले BKTC के इस निर्णय ने आग में घी डालने का काम किया है।

ज्ञात हो कि गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर खुलने वाले हैं। ऐसे में यात्रा शुरू होने से पहले ही प्रवेश नियमों को लेकर राज्य में तनाव और राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। एक तरफ जहां धार्मिक संगठन इसे परंपरा की रक्षा बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे सामाजिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दे रहे हैं।