नीलम गोर्हे (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Women Safety Meeting: विधान भवन में उपसभापति डॉ नीलम गोर्हेकी अध्यक्षता में महिला सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बदलापुर में नाबालिग बच्ची पर हुए अत्याचार और स्वारगेट बस स्टेशन की घटना की पृष्ठभूमि में यह बैठक बुलाई गई थी।
स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा राज्य के 242 स्थानों पर कराए गए सेफ्टी ऑडिट की समीक्षा इस बैठक में की गई। बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक परिवहन स्थलों पर सीसीटीवी, प्रकाश व्यवस्था, महिला पुलिस गश्त, हेल्पलाइन, पैनिक बटन, शौचालय और ‘हिरकणी कक्ष’ की स्थिति की जांच की गई।
रिपोर्ट में यह सामने आया कि सुविधाएं होने के बावजूद उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा। पैनिक बटन प्रणाली के निष्क्रिय पाए जाने पर डॉ। गोर्हे ने इसे नियंत्रण कक्ष और वाट्सऐप नंबर से सीधे जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि आपात स्थिति में महिलाओं को तत्काल सहायता मिल सके।
बैठक में निर्देश दिए गए कि स्कूल बसें स्कूल परिसर के भीतर ही खड़ी की जाएं। बस चालकों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण, बस स्टेशनों पर सीसीटीवी संबंधी स्पष्ट बोर्ड और पैनिक बटन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
📍 विधानभवन, मुंबई
विधानभवनात उपसभापती डॉ. नीलम गोऱ्हे यांच्या अध्यक्षतेखाली सार्वजनिक वाहतूक व्यवस्थेत महिलांच्या सुरक्षिततेसंदर्भात केलेल्या राज्यव्यापी सेफ्टी ऑडिटचा आढावा घेण्यासाठी उच्चस्तरीय बैठक पार पडली. बदलापूर येथील अल्पवयीन मुलीवरील अत्याचाराची घटना आणि स्वारगेट… pic.twitter.com/uVaFIVlf7r — MAHARASHTRA DGIPR (@MahaDGIPR) March 4, 2026
परिवहन विभाग की उपलब्धियां परिवहन विभाग ने बताया कि 633 स्थानों पर सीसीटीवी लगाए जा चुके हैं। स्कूल बसों में महिला सहायक की नियुक्ति अनिवार्य की गई है। जल्द ही सभी बसों में सीसीटीवी, जीपीएस और पैनिक बटन प्रणाली को पुलिस विभाग से जोड़ा जाएगा।
असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों की सुरक्षा के लिए अलग उपाय बनाने और उनके पंजीकरण के लिए विशेष ऐप विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। बैठक के अंत में उप सभापति कार्यालय के माध्यम से स्वतंत्र महिला सुरक्षा समिति गठित करने की घोषणा की गई, जो सेफ्टी ऑडिट की सभी सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक अश्वती दोर्जे, परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य में लड़कियों और महिलाओं के लापता होने के बढ़ रहे मामलों को लेकर दावा किया गया है कि राज्य सरकार ने लापता महिलाओं को ढूंढने के लिए एक स्पेशल सेल का गठन किया है। इसके माध्यम से पिछले साल की तुलना में महिलाओं को तलाशने की संख्या में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
भाजपा के निरंजन डावखरे व अन्य सदस्यों ने विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान महिलाओं के लापता होने का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि इस सेल में एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) लेवल की महिला अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। सर्व कैंपेन की प्लानिंग और उन्हें लागू करने की देखरेख वही करती हैं।
सेल के जरिए महिला अधिकारियों के नेतृत्व में नियमित बैठक की जाती है और प्रगति पर नजर रखी जाती है। लापता महिलाओं को ढूंढने के लिए मुहिम चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले साल में 55 से 60 फीसदी महिलाएं मिल जाती हैं, जबकि ढाई से तीन साल में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। राज्य सरकार का लक्ष्य 95-96 प्रतिशत तक पहुंचाना है। यह मुहिम जारी रहेगी। सरकार हर साल नए ऑपरेशन चलाकर लापता महिलाओं की तलाश को बेहतर बनाने पर फोकस कर रही है।
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मुख्यमंत्री के अनुसार संबंधित पुलिस स्टेशनों की रैंकिंग उनके सर्च ऑपरेशन के परफॉर्मेंस के आधार पर तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि साल 2024 में राज्य में 45,662 महिलाएं और 11,316 नाबालिग लड़कियां लापता हुई थी। साल 2025 में 48,278 महिलाए और 12,113 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए थे। अब तक ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत 41,193 बच्चों और लड़कियों को सफलतापूर्वक ट्रेस किया जा चुका है।