अब शादी के कार्ड पर लिखनी होगी दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि? महाराष्ट्र सरकार ले सकती है फैसला, जानें क्या है वजह
Wedding Card Date of Birth Rule: महाराष्ट्र बाल अधिकार आयोग ने शादी के कार्ड पर जन्मतिथि अनिवार्य करने की सिफारिश की है। सोलापुर में नाबालिगों के मां बनने के मामलों के बाद यह सख्ती बढ़ी है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Maharashtra Child Marriage Prevention Law: महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल विवाह पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार को यह सिफारिश करने का निर्णय लिया है कि शादी के निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि का उल्लेख अनिवार्य किया जाए। आयोग ने कहा कि बाल विवाह तथा बाल यौन शोषण को रोकने के लिए पूरे राज्य में जागरुकता अभियान को तेज किया जाना चाहिए।
आयोग ने राजस्थान की तर्ज पर शादी कार्ड पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि अनिवार्य रूप से छापने की सिफारिश करने का भी फैसला किया है।
सोलापुर के सनसनीखेज मामले ने बढ़ाई चिंता
यह कदम तब उठाया गया है जब हाल ही में सोलापुर जिले में 15 और राज्य भर में कुल 85 नाबालिग लड़कियों के मां बनने के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। आयोग के सदस्य संजय लाखे पाटिल ने इस स्थिति को बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। एक सामाजिक संगठन की शिकायत के बाद पता चला कि पिछले कुछ समय में बड़ी संख्या में कम उम्र की लड़कियां गर्भवती हुई हैं, जो सीधे तौर पर बाल विवाह और यौन शोषण की ओर इशारा करता है।
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23 अप्रैल की बैठक में कड़े निर्देश
संजय विष्णु पुराणिक की अध्यक्षता में 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में आयोग ने मामलों की समीक्षा की और जिला प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पाटिल ने कहा कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील और चिंताजनक है और इसमें तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में बाल विवाह और यौन शोषण के संकेत मिले हैं, साथ ही स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों और अन्य संबंधित विभागों की गंभीर लापरवाही भी सामने आई है।
सभी 85 मामलों की जांच के आदेश
आयोग ने राज्य के सभी जिलों में जिलाधिकारियों के अधीन एक विशेष संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं जिसमें महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इस टीम को सभी 85 मामलों की विस्तृत जांच करने, जिम्मेदारी तय करने और कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करने को कहा गया है। प्रशासन को एक से डेढ़ महीने के भीतर ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
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आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि दोषियों के खिलाफ ‘बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम, 2012’ और ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006’ के तहत मामले दर्ज किए जाएं और सख्त कार्रवाई की जाए। पाटिल ने बताया कि पिछले दस दिनों में एक सामाजिक संगठन की शिकायत के बाद यह मुद्दा सामने आया, जिसमें 85 नाबालिग लड़कियों के मां बनने के मामले बताए गए, जिनमें से 15 सोलापुर जिले से संबंधित हैं।
