Maharashtra Shakti Act: महाराष्ट्र में बढ़ते महिला अपराधों पर उबाल, ‘शक्ति एक्ट’ लागू करने की मांग तेज
Maharashtra Shakti Act News: महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने चिंता बढ़ा दी है।नसरापुर घटना के बाद ‘शक्ति एक्ट’ लागू करने की मांग तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार पर कड़े सवाल उठाए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
महाराष्ट्र शक्ति अधिनियम की मांग हुई तेज (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Shakti Act Demand: राज्य में पिछले कुछ समय से महिलाओं के खिलाफ अपराधों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। एसे शक्ति कानून लागू होने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
बदलापुर कांड और पुणे जिले के नसरापुर में एक बच्ची पर अत्याचार, इन घटनाओं ने राज्य में गुस्से की लहर पैदा कर दी है। इस पृष्ठभूमि में, लंबित ‘शक्ति एक्ट’ को तुरंत लागू करने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।
महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और हैरेसमेंट (सेक्शन 354) के मामलों में महाराष्ट्र अक्सर देश में पहले स्थान पर रहा है। महिलाओं के ऑनलाइन हैरेसमेंट के मामलों में मुंबई और पुणे देश में ‘हॉटस्पॉट’ बन गए हैं।
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कानूनी जानकारों का मानना है कि यह कानून अपराधियों पर कड़ी नजर रखने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। महाविकास आघाड़ी सरकार ने आंध्र प्रदेश के ‘दिशा’ कानून की तर्ज पर एक सख्त कानून बनाने का विचार पेश किया था।
2 दिसंबर, 2021 को विधानमंडल के दोनों सदनों ने एकमत से ‘शक्ति क्रिमिनल लॉज (महाराष्ट्र अमेंडमेंट) बिल पारित किया गया था। इसका मकसद बढ़ते क्राइम को रोकना और महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए था।
बिल को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया था। लेकिन, सेंटर के नए क्रिमिनल लॉ की वजह से, यह कुछ तकनीकी बदलावों के साथ फिर से अप्रूवल प्रोसेस से गुज़र रहा है।
शक्ति एक्ट के मुख्य नियम –
- रेप और गैंग रेप जैसे अपराध के लिए ‘मौत की सजा’ (फांसी) का प्रावधान।
- अपराध दर्ज होने के 15 वर्किंग दिन के अंदर जांच पूरी करने और फिर अगले 30 दिनों के अंदर केस में फ़ैसला सुनाने का मकसद, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं पर कुल अत्याचारों में महाराष्ट्र लगातार देश में दूसरे स्थान पर रहा है।
- एसिड अटैक के लिए कम से कम 15 साल से लेकर उम्रकैद और विक्टिम के ट्रीटमेंट के लिए अपराधी पर भारी जुर्माना। सोशल मीडिया, ई-मेल या मैसेज के जरिए महिलाओं को बदनाम करने वालों के लिए 2 साल तक की सजा। हर जिले में अलग स्पेशल कोर्ट और स्पेशल पुलिस टीम बनाना।
अब राज्य सरकार हो ‘एनकाउंटर’, नसरापुर घटना पर भड़के राऊत
नसरापुर में हुए कथित अत्याचार मामले को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (ठाकरे गुट) के सांसद संजय राऊत और कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए है।
राऊत ने पत्रकार परिषद में कहा कि राज्य में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही है और सरकार पूरी तरह विफल साचित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कानून-व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक प्रचार में व्यस्त है। राऊत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस सरकार पर केस दर्ज कर इसका एनकाउंटर करो।
राज्य में बढ़ रहे अपराध
राज्य में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर राकांपा (एसपी) के नेता व पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने महायुति सरकार के खिलाफ कड़ा रूख अपनाया है। उन्होंने सवाल उठाए है कि सुशासन का दावा करने वाली सरकार में महिलाएं व बच्चे सुरक्षित नहीं है। राज्य में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं की वजह से कानून का कोई डर नहीं है। उन्होंने मांग की है कि ‘शक्ति कानून’ तत्काल लागू किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र को कहां ले आए हो
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भी सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि हर मराठी नागरिक के मन में सवाल है कि महाराष्ट्र को कहा ले आए हो? वडेट्टीवार ने पीड़ित परिवार के साथ कथित दुर्व्यवहार और न्याय की मांग कर रहे लोगों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में आरोपी खुलेआम घूम रहा है, जबकि न्याय की मांग करने वालों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है।
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पुणे केस में राष्ट्रीय महिला आयोग की एंट्री
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने पुणे में चार वर्षीय बच्ची से ‘बलात्कार और उसकी हत्या’ की घटना को बेहद दुखद एवं मानवता पर कलंक बताया है। रहाटकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शनिवार को एक पोस्ट में कहा कि पुणे के नसरापुर इलाके की यह घटना हृदयविदारक है, एनसीडब्ल्यू ने मामले का संज्ञान लिया है और राष्ट्रीय बाल एनसीपीसीआर को पत्र लिखकर आवश्यक और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
