Maharashtra Board Marksheet: QR कोड और फोटो के साथ हाईटेक सर्टिफिकेट, 15 दिनों में मिलेगा रिजल्ट दस्तावेज

Maharashtra Board Marksheet News: महाराष्ट्र बोर्ड ने मार्कशीट और प्रमाणपत्र को एक ही दस्तावेज में देने का फैसला किया है। नई व्यवस्था में QR कोड और हाईटेक सुरक्षा फीचर्स होंगे।
Maharashtra Board Marksheet Certificate
महाराष्ट्र बोर्ड मार्कशीट और सर्टिफिकेट की नई व्यवस्था (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra Board Marksheet Certificate: महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अब मार्कशीट और प्रमाणपत्र को एक ही दस्तावेज में देने का निर्णय लिया है।

शनिवार दोपहर 12 बजे बोर्ड ने ऑनलाइन परिणाम घोषित किया और साथ ही नई प्रणाली की जानकारी भी दी। बोर्ड अध्यक्ष त्रिगुण कुलकर्णी ने बताया कि इस वर्ष से छात्रों को अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से युक्त प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जो परीक्षा परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर संबंधित स्कूलों और कॉलेजों के माध्यम से वितरित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि अब तक बारहवीं परीक्षा में मार्कशीट और प्रमाणपत्र अलग-अलग दिए जाते थे, लेकिन नई व्यवस्था में दोनों को एक ही दस्तावेज में शामिल कर दिया गया है। इसके अलावा नाम लिखने के क्रम में भी बदलाव किया गया है। पहले दस्तावेजों में सरनेम पहले लिखा जाता था, लेकिन अब पहले छात्र का नाम, फिर पिता का नाम और अंत में सरनेम लिखा जाएगा।

QR कोड के साथ हाईटेक सर्टिफिकेट सिस्टम लागू

नई मार्कशीट और प्रमाणपत्र में कई आधुनिक सुरक्षा फीवर्स जोड़े गए हैं, जिनमें छात्र की फोटो, क्यूआर कोड और होलोग्राम शामिल हैं। इसके साथ ही प्रमाणपत्र के डिजाइन में भी बदलाव किया गया है, जिसमें गणितीय और वर्णमाला से जुड़े डिजाइन तत्व शामिल किए गए हैं।

महाराष्ट्र बोर्ड के अनुसार, पहले जारी किए गए प्रमाणपत्रों में कई त्रुटियां पाई जाती थीं, जिन्हें अब पूरी तरह से सुधार दिया गया है। नई प्रणाली के बाद फर्जीवाड़ा या डुप्लीकेट प्रमाणपत्र बनाना लगभग असंभव हो जाएगा।

15 दिनों के भीतर वितरण

पहले छात्रों को मार्कशीट 10 दिनों में मिल जाती थी, जबकि प्रमाणपत्र के लिए 6 महीने तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब दोनों एक साथ और 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जाएंगे। इस नई व्यवस्था से बोर्ड को करीब 3 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। पहले दो अलग-अलग प्रमाणपत्रों के कारण कागज और छपाई पर भारी खर्च होता था, जो लगभग 10 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता था। अब यह खर्च घटकर 7 करोड़ रुपये रह जाएगा। प्रमाणपत्रों का डिजाइन बालभारती संस्थान में तैयार किया गया है, जिसमें भाषा विशेषज्ञ सलील वाघमारे का योगदान रहा है।

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