
देवेंद्र फडणवीस (सौ. सोशल मीडिया X )
Maharashtra News: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि दीर्घकालिक कृषि को जलवायु अनुकूल बनाने के लिए बीज क्षेत्र में नवोन्मेषण जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य अगले 2 से 3 साल में 25 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाना है, इसलिए बीज कंपनियों को ऐसी खेती प्रणालियों के अनुकूल किस्में विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में एशियाई बीज कांग्रेस-2025 के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि दीर्घकालिक स्तर पर कृषि को जलवायु अनुकूल बनाने के लिए बीज क्षेत्र में नवाचार आवश्यक है।
भारत का बीज बाजार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक है जिसका वर्तमान अनुमानित आकार लगभग 7।8 अरब डॉलर का है और वर्ष 2030 तक इसके लगभग 19 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्राजील के बाद भारत पांचवें स्थान पर है और देश में इस्तेमाल होने वाले 95% से ज्यादा बीज घरेलू स्तर पर ही उत्पादित किए जाते हैं।
यह सीधे तौर पर ‘मेक इन इंडिया‘ को मजबूत करता है। जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव की ओर इशारा करते हुए फडणवीस ने कहा कि जलवायु सहिष्णु और जलवायु-प्रतिरोधी बीज किस्मों की मांग बढ़ रही है। जलवायु अनुकूल कृषि के लिए रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करना और नवीन बीज तकनीकों को अपनाना बेहद जरूरी है।
ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी बीज आपूर्ति प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएगी। महाराष्ट्र की पहल पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने देश की पहली महा कृषि एआई नीति तैयार की है और एआई-संचालित कृषि योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रारंभिक कोष आवंटित किया है।
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केंद्रीय मंत्री चौहान ने घोषणा की कि केंद्र आगामी बजट सत्र के दौरान घटिया और अनधिकृत बीजों की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए एक नया बीज अधिनियम पेश करेगा।
बागवानी फसलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली रोपण साम्सी सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र में 3 स्वच्छ पौध केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। किसानों को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर देते हुए चौहान ने बीज कंपनियों से किसानों के हितों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।






