36 घंटे से ज्यादा ड्यूटी, नींद की कमी और मानसिक थकान….रेजिडेंट डॉक्टरों पर सर्वे ने बढ़ाई चिंता
Maharashtra Resident Doctors Survey: रेजिडेंट डॉक्टरों पर किए गए एक सर्वे में लंबे कार्य घंटे, मानसिक और शारीरिक थकान, नींद की कमी तथा काम के बढ़ते दबाव की गंभीर तस्वीर सामने आई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
रेजिडेंट डॉक्टर सर्वेक्षण (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Resident Doctors Survey News: महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्य परिस्थितियों पर फेडरेशन का ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के रिव्यू मेडिकल सिस्टम 2.0 सर्वे ने दर्दभरी तस्वीर सामने रखी है।
सर्वे के अनुसार मरीजों का इलाज करते-करते बड़ी संख्या में डॉक्टर मानसिक और शारीरिक थकान का सामना कर रहे हैं। इससे वे खुद भी टूटते नजर आ रहे हैं। 53.2 प्रतिशत डॉक्टरों ने 36 घंटे से अधिक लगातार ड्यूटी करने की बात कही, जबकि 78 प्रतिशत ने बर्नआउट के लक्षण और 82.6 प्रतिशत ने नींद की कमी की शिकायत की। सबसे गंभीर तथ्य यह रहा कि 16.5 प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टरों ने काम के अत्यधिक तनाव के कारण आत्म-हानि के विचार आने की बात स्वीकार की।
82.6 प्रतिशत डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी के कारण नींद नहीं हो रही पूरी
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन द्वारा सरकारी और निजी मेडिकल शिक्षण संस्थानों के 109 रेजिडेंट डॉक्टरों पर किए गए सर्वे में लंबे कार्य घंटे, अत्यधिक काम का दबाव, मानसिक तनाव और पर्याप्त विश्राम की कमी जैसी चिंताजनक स्थितियां उजागर हुई हैं।
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सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 78 प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टरों ने बताया कि वे अक्सर या कभी-कभी बर्नआउट यानी मानसिक और शारीरिक थकावट का सामना करते हैं। वहीं 82.6 प्रतिशत डॉक्टरों ने लंबी ड्यूटी के कारण नींद पूरी नहीं होने की बात कही। सर्वे में 53.2 प्रतिशत डॉक्टरों ने स्वीकार किया कि उन्हें लगातार 36 घंटे से अधिक ड्यूटी करनी पड़ी।
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कार्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत
फेडरेशन का मानना है कि रेजिडेंट डॉक्टरों के कार्य घंटे, विश्राम अवधि और मानसिक स्वास्थ्य सहायता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर कार्य परिस्थितियां न केवल डॉक्टरों के स्वास्थ्य की रक्षा करेंगी, बल्कि मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
