हर्षवर्धन सपकाल और नरहरि झिरवल (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra Ministry Office Sealed: महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर एक अनचाही मुसीबत आन पड़ी है। गुरुवार की रात अन्न और औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवल के मंत्रालय में तैनात एक क्लर्क को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद खलबली मची हुई है। विपक्ष को जहां घर बैठे सरकार पर आरोप लगाने का मौका मिल गया है, वहीं महायुति में इस मुद्दे पर मतभेद बढ़ गए हैं।
कुछ लोग इसे अजीत की राकां पर दबाव डालने की साजिश बता रहे हैं तो शिंदे गुट ने खुलकर मंत्रालय में तैनात भ्रष्ट अफसरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। छापेमारी के बाद भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग ने मंत्री नरहरि झिरवल के कार्यालय को सील कर दिया, जिससे यह मामला और बिगड़ गया। मंत्री ने सील के दावों को खारिज किया पर अब कांग्रेस ने मंत्री पर ही रिश्वतखोरी में लिप्त होने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल में ने ट्वीट कर कहा, ‘राज्य के एफडीए मंत्री नरहरि झिरवल के कार्यालय के कर्मचारी को मंत्रालय रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने मंत्री का कार्यालय सील कर दिया। इस घटना ने राज्य सरकार की इज्जत की धज्जियां उड़ा दी हैं। चौकाने वाली बात यह कि पूछताछ के दौरान इस कर्मचारी ने बताया कि उसने वरिष्ठों के कहने पर रिश्वत ली थी। यह और भी गंभीर है। इसलिए मंत्री झिरवल और उनके कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की गहन जांच होनी चाहिए।’
सपकाल द्वारा जहां झिरवल पर हमला किया जा रहा है वहीं पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले उनसे सहानुभूति दिखा रहे हैं। पटोले ने कहा कि नरहरि झिरवल एक आदिवासी हैं। इसलिए उनके कार्यालय में जानबूझकर बिछाया गया। सरकार के हर विभाग में भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा है। कांग्रेस नेता यशोमति ठाकुर ने भी इस मामले को भाजपा की साजिश बताते हुए कहा कि यह टक्केवारी की सरकार है और आदिवासी होने के कारण झिरवल को बदनाम किया जा रहा है।
झिरवल के मंत्रालय में पदस्थ क्लर्क राजेंद्र ढेरंगे ने एक शिकायतकर्ता का मेडिकल लाइसेंस निलंबन न करने के एवज में 50 हजार की मांग की थी। बाद में 35 हजार में सौदा तय हुआ। गुरुवार को ढेरंगे को गिरफ्तार किया गया था। शुक्रवार को एसीबी ने उसे कोर्ट में पेश किया जहां से उसे 16 फरवरी तक कस्टडी में भेज दिया गया। फिलहाल एसीबी गिरफ्तार कर्मचारी और संदिग्धर वरिष्ठ अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों की जांच कर रही है।
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शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि मंत्रालय में भी खुलेआम रिश्वत ली जा रही है। ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों को मंत्रालय से बाहर फेंक देना चाहिए, अजीत गुट ने पूरा दिन इस पर कोई बयान नहीं दिया और चुप्पी साधे रखी।
दूसरी ओर विरोधियों के बढ़ते दबाव के बीच मंत्री झिरवल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पकड़ा गया व्यक्ति एक सरकारी कर्मचारी है और उसके इस कृत्य से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में मेरे कार्यालय के किसी भी व्यक्ति या मुझसे जुड़े किसी भी तार की पुष्टि होती है, तो मैं 100% इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं।