Maharashtra में समुद्री सुरक्षा मजबूत, MDA सिस्टम से 32,000 जहाजों की होगी निगरानी
Maharashtra में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए MDA सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे हजारों जहाजों की निगरानी संभव होगी। यह तकनीक छोटी नावों की गतिविधियों पर नजर रखकर घुसपैठ रोकने में मदद करेगी।
- Written By: अपूर्वा नायक
महाराष्ट्र कोस्टल सिक्योरिटी ट्रैकिंग (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra MDA System Coastal Security: राज्य की समुद्री सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए नई पहल की गई है। अब समंदर में संदिग्ध जहाजों की निगरानी के लिए मरीन डोमेन अवेयरनेस (एमडीए) सिस्टम का इस्तेमाल होगा। इसकी मदद से 32,000 जहाजों को ट्रैक करने और 877 किमी लंबे समुद्री तट की निगरानी की जा सकेगी।
साल 2008 में समुद्र के रास्ते आतंकवादी छोटी नाव से मुंबई में घुसे थे। यह नया सिस्टम भविष्य में ऐसे खतरों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इंडियन नेवी और महाराष्ट्र पुलिस ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास के साथ मिलकर तटीय सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए पालघर से सिंधुदुर्ग तक संदिग्ध जहाजों को ट्रैक करने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन (एमडीए) पर काम शुरू किया है।
सम्बंधित ख़बरें
लोनावला के पास भीषण लैंडस्लाइड: मुंबई-पुणे रेल मार्ग पूरी तरह ठप, 17 ट्रेनें रद्द और 31 के रूट बदले
कब शुरू होगा मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक? लैंडस्लाइड के बाद मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने किया मुआयना, दिया ये अपडेट
मुंबई में आसमानी आफत, पहले फटे बादल और अब भूखे रहने की नौबत, डब्बेवालों के फैसले से संकट में मुंबईकर
मनोरी बीच पर विदेशी जहाज का संकट, तूफानी लहरों के बीच फंसी शिप, कोस्ट गार्ड और नौसेना अलर्ट
प्रोजेक्ट की सर्वर क्षमता बढ़ाने का काम चल रहा है। जहाजों और कंट्रोल रूम के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन के साथ बातचीत चल रही है। समुद्र में नेटवर्क कवरेज को बेहतर बनाने के लिए और कोस्टल टावर लगाए जा रहे है।
– राजीव जैन, हेड- राज्य तटीय सुरक्षा
सुरक्षा के लिहाज से बहुत अच्छी पहल है, बड़े जहाजों के डिवाइस से रडार के माध्यम से पहचान की जा सकती है। लेकिन छोटी नावों की पहचान के लिए कोई कारगर सिस्टम नहीं है। देखना होगा कि यह कितना सफल होता है। यह सिस्टम मोबाइल नंबर पर निर्भर है। इसलिए जरूरी है कि पंजीकृत मोबाइल नंबर बदली न हो। इसके अलावा संदिग्ध क्षण क्या होता है। इस पर भी सोच विचार करना होगा। यदि संदिग्ध जहाज पहचान हो तो तुरंत कार्रवाई कर उसे पकड़ना होगा।
– ब्रिगेडियर हेमंत महाजन, पूर्व सैनिक
Maharashtra में अधिक लागत से कतरा रहे मछुआरे
विशेषज्ञों के अनुसार इस सिस्टम को लगाने के लिए 25 से 30 हजार रुपये का खर्च आता है। लागत अधिक होने के कारण मछुआरे इससे कतरा रहे हैं। इसलिए मोबाइल नंबर के जरिए छोटी जहाजों को ट्रैक किया जाएगा। मछुआरों की बोट अक्सर शाम को समुद्र में जाती है और सुबह लौटती है।
बोट शाम को किनारे आ रही है या दिन में जा रही है, तो आपराधिक गतिविधियों का संदेह निर्माण होता है। इस सिस्टम से छोटी जहाजों की मूवमेंट और उन्हें आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। तस्करी या अन्य आपराधिक गतिविधियों की पहचान करने में यह मददगार साबित होगा।
ये भी पढ़ें :- Maharashtra में कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक बदलाव, 8 हजार नए पदाधिकारियों की होगी नियुक्ति
टेस्ट में सफल रहा सिस्टम
आईआईटी मद्रास के एक प्रोफेसर ने नया सिस्टम एमडीए बनाया है। एमडीए एप्लीकेशन वाले मोबाइल फोन मछुआरों और यात्री जहाजों के ऑपरेटरों को इस्तेमाल के लिए दिए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले 100 मछुआरों की जहाजों पर इसकी जांच की गई, यह हलचल पैटर्न को ट्रैक करने में बहुत असरदार पाया गया।
