अब सिर्फ 200 रुपए में होगी खेत की पैमाइश, जमीन के पारिवारिक विवादों से मिलेगा छुटकारा, जानें पूरी प्रक्रिया
Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने जमीन के बंटवारे और सातबारा अपडेट के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब किसान मात्र 200 रुपए प्रति हिस्सा शुल्क देकर आधिकारिक तौर पर जमीन की पैमाइश करा सकेंगे।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Land Measurement Fee: ग्रामीण इलाकों में अक्सर देखा जाता है कि एक ही सर्वे नंबर या गोट (Gat Number) की जमीन को लेकर भाइयों और परिवार के सदस्यों के बीच वर्षों तक विवाद चलता रहता है। इन पारिवारिक झगड़ों को खत्म करने और राजस्व रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब किसान नाममात्र के शुल्क पर अपनी जमीन के टुकड़ों का आधिकारिक विभाजन और पैमाइश करा सकेंगे।
सिर्फ 200 रुपए में होगा काम
पहले जमीन की पैमाइश और नक्शा बनवाने के लिए किसानों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब महाराष्ट्र सरकार ने फैसला किया है कि संयुक्त परिवार की जमीन के बंटवारे, पंजीकृत बंटवारा पत्र या महाराष्ट्र भूमि राजस्व अधिनियम 1966 के तहत होने वाले विभाजन के लिए किसानों से प्रति हिस्से केवल 200 रुपये शुल्क लिया जाएगा।
आवेदन करने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद लगभग एक महीने के भीतर माप की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। सभी सह-स्वामियों के हस्ताक्षर के साथ तहसीलदार या भूमि अभिलेख कार्यालय में आवेदन करना होगा।
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क्या है ‘पोटहिस्सा मोजणी’ (Sub-division Measurement)?
जब एक संयुक्त परिवार के नाम पर दर्ज किसी एक सर्वे नंबर या गट की जमीन का आपस में बंटवारा होता है, तो नक्शे पर प्रत्येक हिस्सेदार की जमीन को अलग-अलग दिखाना ‘पोटहिस्सा मोजणी’ (Sub-division Measurement) कहलाता है। इससे मूल गट के उप-विभाग हो जाते हैं। हर हिस्सेदार को अपना स्वतंत्र हिस्सा और अलग सातबारा (7/12) मिल जाता है। भविष्य में जमीन बेचने या बैंक से लोन लेने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आती।
पैमाइश की ‘क’ प्रति अब समय पर मिलेगी
अमरावती के तहसीलदार विजय लोखंडे के अनुसार, प्रशासनिक देरी को कम करने के लिए सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है। पैमाइश पूरी होने के बाद मिलने वाला आधिकारिक नक्शा (क-प्रति) अब किसानों को निर्धारित समय के भीतर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए ई-मोजणी पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।
आवेदन के लिए आवश्यक शर्तें और दस्तावेज
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं।
सभी की सहमति: सातबारा पर दर्ज सभी हिस्सेदारों की लिखित सहमति अनिवार्य है। यदि विवाद है, तो मामला दीवानी न्यायालय में जाएगा।
दस्तावेज: चालू सातबारा (7/12), 8-अ उतारा और यदि रजिस्टर्ड बंटवारा पत्र है तो वह आवश्यक है।
समय सीमा: आवेदन और शुल्क जमा करने के बाद लगभग एक महीने के भीतर मामले का निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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डिजिटल सातबारा की ओर कदम
अक्सर परिवारों में जमीन का ‘मौखिक बंटवारा’ तो हो जाता है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वह दर्ज नहीं होता। इससे रिकॉर्ड में त्रुटियां बनी रहती हैं। सरकार का यह कदम डिजिटल सातबारा को पूरी तरह सटीक और अपडेट बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
