

Maharashtra Health Department New Training Policy: महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, सक्षम और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक नई ट्रेनिंग पॉलिसी की घोषणा की है।
इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग की मैनपावर के ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण को निखारना और अधिक सक्षम बनाना है। मंत्री प्रकाश आबिटकर ने जानकारी दी कि इस नीति के तहत पूरी प्रशिक्षण प्रणाली में व्यापक बदलाव किए गए हैं ताकि नागरिकों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
इस नई नीति के तहत राज्य की सभी प्रशिक्षण संस्थाओं को अब सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रशिक्षण निदेशालय, नागपुर के तकनीकी और प्रशासनिक नियंत्रण में लाया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य भर में दी जाने वाली ट्रेनिंग में एकसूत्रता लाना और इसे अधिक परिणामकारक व सुगठित बनाना है।
इस प्रशिक्षण को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया न मानकर मानव संसाधन विकास में एक महत्वपूर्ण निवेश के रूप में देखा जा रहा है।
इस नीति के तहत प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था को तीन स्तरों पर संगठित और मजबूत किया जाएगा।
नोडल संस्था: राज्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण प्रशिक्षण संस्थान, नागपुर इस सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की मुख्य नोडल प्रशिक्षण संस्था के रूप में कार्य करेगी।
विभागीय, जिला और तहसील स्तर: इन तीनों स्तरों पर प्रशिक्षण के मौजूदा बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
नए प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना: आवश्यकता के अनुसार राज्य के विभिन्न हिस्सों में नए प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।
विभाग के सभी नियमित और कंट्रैक्ट पर काम करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए अब ट्रेनिंग को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत कई कड़े नियम बनाए गए हैं।
प्रारंभिक प्रशिक्षण: सेवा में शामिल होने वाले नए कर्मचारियों को अपनी ज्वाइनिंग के एक वर्ष के भीतर अपना शुरुआती प्रशिक्षण पूरा करना होगा।
प्रमोशन: पदोन्नति मिलने के बाद भी संबंधित प्रशिक्षण को पूरा करना अनिवार्य रहेगा।
सेवा के दौरान रिफ्रेशर कोर्स: कर्मचारियों को उनकी 4 से 6 वर्षों की सेवा पूरी होने पर मध्य-स्तर का रिफ्रेशर कोर्स कराया जाएगा।
वरिष्ठ स्तर की ट्रेनिंग: सेवा के 10 वर्ष पूरे होने के बाद कर्मचारियों को प्रगत या वरिष्ठ स्तर का उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अनुपस्थिति पर कार्रवाई: बिना अनुमति के प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ प्रचलित नियमों के अनुसार कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
कर्मचारियों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय व्यावहारिक और प्रत्यक्ष कौशल सिखाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए 28 दिनों का आवासीय स्किल लैब प्रशिक्षण प्रस्तावित किया गया है।
इसमें से 20 दिन कर्मचारी कौशल प्रयोगशाला (स्किल लैब) में प्रत्यक्ष अभ्यास करेंगे। 8 दिन उन्हें जिला अस्पताल में सीधे मरीजों के बीच जाकर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके अलावा, आशा, आंगनवाड़ी सेविकाओं और एएनएम के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में राज्य और जिला स्तर के प्रशिक्षकों की निरंतर भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की प्रत्येक श्रेणी के पद की आवश्यकताओं का गहन विश्लेषण करके 5 साल की प्रशिक्षण रूपरेखा और वार्षिक प्रशिक्षण योजना तैयार की जाएगी। इस योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के बजट से स्कीम के रूप में किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने इस नीति की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने के लिए कुशल और प्रशिक्षित मैनपावर अत्यंत आवश्यक है। यह नीति स्वास्थ्य कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाकर राज्य के नागरिकों को उच्च दर्जे की स्वास्थ्य सुविधाएं देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।
वहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ. निपुण विनायक ने कहा कि राष्ट्रीय प्रशिक्षण नीति के तहत तैयार किया गया यह ढांचा न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारेगा, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक लोकाभिमुख बनाएगा जिससे सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली पर नागरिकों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।