Wardha News: वर्धा के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की कमी, 33 पीएचसी में 37 चिकित्सक ठेके पर

Doctor Shortage In Wardha: वर्धा जिले की 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों के 68 पद मंजूर हैं, लेकिन इनमें केवल 31 स्थायी डॉक्टर कार्यरत हैं।
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वर्धा स्वास्थ्य विभाग(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Wardha Health Department: वर्धा जिले के ग्रामीन अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा भार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर निर्भर है। ऐसे में पीएचसी में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद ग्रामीणों को रहती है। हालांकि, कई बार मामूली स्वास्थ्य जांच के लिए भी ग्रामीणों को शहरों का रुख करना पड़ता है। इसका प्रमुख कारन पीएचसी में पर्याप्त मनुष्यबल और आवश्यक सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है।

वर्तमान में जिले में 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कार्यरत हैं। इन केंद्रों में चिकित्सकों के कुल 68 पद मंजूर हैं। इनमें से 31 पदों पर स्थायी चिकित्सक, जबकि 37 चिकित्सक कंत्राटी पद्धति से सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा महिला एवं पुरुष स्वास्थ्य सेवकों के भी अनेक पद रिक्त होने की जानकारी है। समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहने के कारन ग्रामीणों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।

जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग

जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी पीएचसी में पर्याप्त दवाइयों का स्टॉक उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। इसके बावजूद कई बार मरीजों को आवश्यक दवाइयां नहीं मिल पातीं। इसके चलते उन्हें ग्रामीन अस्पताल, उपजिला अस्पताल अथवा जिला अस्पताल का रुख करना पड़ता है। एक्स-रे, सोनोग्राफी सहित अन्य जांचों के लिए भी मरीजों को उच्चस्तरीय अस्पतालों में जाना पड़ता है।

वर्तमान में बारिश का मौसम होने से जलजनित बीमारियों के साथ-साथ सर्पदंश के मामले भी सामने आते हैं। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त उपचार सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों की स्थिति गंभीर हो सकती है। कई बार एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद समय पर उसका लाभ नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आती हैं।

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पीएचसी को और सक्षम बनाने पर दे जोर

ग्रामीन क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सक्षम और सुविधायुक्त बनाने के लिए पीएचसी में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ ही पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति करने की आवश्यकता है। आपदा की स्थिति में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश होने के बावजूद कुछ कर्मचारी शहर से आना-जाना करते हैं, ऐसीही शिकायतें हैं। गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है।

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