

Wardha University Administration Dispute: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय निरंत सुर्खियों में है। गुरुवार को छात्रों और शोधार्थियों ने प्रशासनिक भवन के पास जोरदार नारेबाजी कर प्रशासनिक भवन को ताले जडे दिए। उक्त घटना के बाद परिस्थिति तनावपूर्ण हुई। इस संदर्भ में विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी बुद्धदास मिरगे ने रामनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने छह छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। विवि में छात्र व प्रशासन फिर एक बार आमने सामने आया है। शिकायत के अनुसार विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने कुछ छात्र और शोधार्थी अराजकता कर रहे थे।
गुरुवार दोपहर करीब 12.30 बजे छात्रों और शोधार्थियों ने प्रशासनिक भवन के सभी प्रवेश एवं निकासी द्वारों पर ताले जड़ दिए। इससे अधिकारी और कर्मचारी अंदर ही बंधक जैसी स्थिति में फंस गए और विश्वविद्यालय का कामकाज प्रभावित हुआ। इस दौरान कुलगुरु जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली की चयन समिति की बैठक में ऑनलाइन जुड़ी हुई थीं।
छात्रों और शोधार्थियों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इससे बैठक में व्यवधान उत्पन्न होने पर उन्हें शांत रहने के लिए कहा गया। लेकिन शिकायत के मुताबिक नारेबाजी जारी रही। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुलगुरु के घर जाने के लिए बाहर निकलने के दौरान छात्रों ने उनकी कार को रोक दिया। वहीं, राजेश कुमार यादव ने वाचस्पति भवन में चल रही कक्षा के दरवाजे की कुंडी तोड़कर अंदर प्रवेश किया और कक्षा में व्यवधान उत्पन्न किया। रामनगर पुलिस ने छात्र राजेश कुमार यादव, रामचंद्र, निरंजन कुमार, राकेश अहिरवार, राहुल कुमार और शिव पूजन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर आगे की जांच शुरू कर दी है।
विश्वविद्यालय में प्रशासनिक भवन के चारों गेट 8 जुलाई से बंद होने के विरोध में छात्रों और शोधार्थियों ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। छात्र सभी गेट तत्काल खोलने और प्रशासनिक कार्य पूर्ववत शुरू करने की मांग कर रहे थे़ छात्रों ने कुलपति प्रो। कुमुद शर्मा से सार्वजनिक संवाद की भी मांग की। उनका कहना है कि कैंटीन, जेरॉक्स, पानी, 24 घंटे लाइब्रेरी, छात्रावास सुविधाएं, शिक्षकों की कमी, सेमेस्टर बैक तथा शिकायतों के पारदर्शी निवारण सहित कई समस्याएं लंबित हैं।
छात्रों ने समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से लिखित आश्वासन और निश्चित समय-सीमा तय करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संवाद के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस बल बुलाया तथा आंदोलन से दूर रहने के लिए छात्रों पर दबाव और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई। छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी शैक्षणिक सुविधाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संवाद व समाधान की मांग कर रहे हैं।