मुंबई में LPG संकट पर अमित देशमुख का बड़ा दावा, सनराइजर्स की पाकिस्तानी खिलाड़ी की खरीद पर भड़के कांग्रेस नेता

Amit Deshmukh Statement: कांग्रेस विधायक अमित देशमुख ने मुंबई में रसोई गैस की भारी किल्लत का दावा करते हुए सरकार को घेरा है। साथ ही, सनराइजर्स द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने पर कड़ी आपत्ति जताई।
Amit Deshmukh On LPG Shortage:
कांग्रेस विधायक अमित देशमुख (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Amit Deshmukh On LPG Shortage: देश में LPG सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर राजनीति गरमा गई है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय जनता को यह भरोसा दिलाने में जुटे हैं कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, वहीं महाराष्ट्र के कद्दावर कांग्रेस नेता अमित देशमुख ने चौंकाने वाला दावा किया है। देशमुख के अनुसार, मुंबई के कमर्शियल सेक्टर विशेषकर रेस्टोरेंट्स, होटलों और कैंटीनों में कुकिंग गैस की किल्लत शुरू हो गई है।

सड़कों पर चर्चा, सरकार बेखबर?

मीडिया से बातचीत के दौरान अमित देशमुख ने कहा कि आज आम आदमी परेशान है। आप बाजार में जाकर देखें, होटल और रेस्टोरेंट चलाने वाले लोग गैस की कमी की शिकायत कर रहे हैं। जब सड़कों पर इसी संकट की चर्चा हो रही है, तो मुझे समझ नहीं आता कि केंद्रीय मंत्री किस आधार पर कह रहे हैं कि सब ठीक है। यह धरातल की हकीकत से कोसों दूर है।

काव्या मारन की टीम पर भी दिया बड़ा बयान

गैस संकट के अलावा, अमित देशमुख ने क्रिकेट की दुनिया से जुड़े एक विवाद पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। 'द हंड्रेड लीग' में काव्या मारन की टीम 'सनराइजर्स लीड्स' द्वारा पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को साइन किए जाने पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई।

देशमुख ने कहा  कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों और सीमा पार आतंकवाद के इतिहास को देखते हुए, किसी भारतीय स्वामित्व वाली टीम का पाकिस्तानी खिलाड़ियों से जुड़ना गलत है। यह देश की जनता की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है। मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं और इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।

चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए देशमुख ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश से चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर शिकायतें आ रही हैं। अगर लोकसभा और राज्यसभा में इस पर चर्चा की नौबत आ रही है, तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। लोगों का संस्थाओं से भरोसा उठना लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com