प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Maharashtra Financial Crisis: महाराष्ट्र का सार्वजनिक कर्ज़ तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह कर्ज़ बढ़कर 9.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जो पिछले वर्ष के 8.39 लाख करोड़ रुपये से 18.3 प्रतिशत अधिक है। यह राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य का कुल कर्ज 4,51,117 करोड़ रुपये था। अगले वर्ष 2020-21 में यह बढ़कर 5,19,086 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2021-22 में कर्ज़ 5,76,868 करोड़ रुपये और 2022-23 में 6,29,235 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
वित्त वर्ष 2023-24 में कर्ज और तेजी से बढ़कर 7,18,507 करोड़ रुपये हो गया। वहीं 2024-25 में यह 8,39,275 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अनुमान के अनुसार 2025-26 में यह 9,32,242 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। केवल उसी वर्ष राज्य को कर्ज़ पर 64,659 करोड़ रुपये का ब्याज भी देना होगा। महाराष्ट्र की जीडीपी के हिसाब से राज्य का कर्ज लगभग 18.3 प्रतिशत है। यह दिखाता है कि राज्य की वित्तीय स्थिति पर कर्ज का दबाव बढ़ रहा है। इस स्थिति से राज्य की विकास योजनाओं और आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते कर्ज के बीच बजट को संतुलित रखना और खर्चों में सही प्राथमिकता तय करना बहुत जरूरी हो गया है। महाराष्ट्र की आर्थिक नीतियों में सुधार और कर्ज प्रबंधन के मजबूत कदम ही राज्य की वित्तीय मजबूती सुनिश्चित कर सकते हैं।
| वर्ष | कर्ज (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| 2019-20 | 4,51,117 |
| 2020-21 | 5,19,086 |
| 2021-22 | 5,76,868 |
| 2022-23 | 6,29,235 |
| 2023-24 | 7,18,507 |
| 2024-25 | 8,39,275 |
| 2025-26 | 9,32,242 |
यह भी पढ़ें:- महाराष्ट्र बजट 2026: वैनगंगा-नलगंगा प्रोजेक्ट के लिए 94,968 करोड़, खेती-सिंचाई के लिए खुला खजाना
बता दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,69,467 करोड़ रुपए के कुल व्यय वाला बजट पेश किया है। इस बजट में एक तरफ आम आदमी को स्वास्थ्य सेवाओं में राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। बजट में आम जनता को स्वास्थ्य के मोर्चे पर बड़ी राहत दी गई है, वहीं व्यसनों पर लगाम लगाने के लिए टैक्स बढ़ाया गया है। बजट में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कैंसर और मधुमेह (Diabetes) के इलाज को सस्ता किया गया है।