बढ़ती ईंधन कीमतों से गिग वर्कर्स परेशान, प्रति किलोमीटर 20 रुपये भुगतान की मांग तेज
Maharashtra Gig Workers Issue: महाराष्ट्र के लाखों गिग वर्कर्स ने बढ़ती ईंधन कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए प्रति किलोमीटर न्यूनतम 20 रुपये भुगतान की मांग उठाई है। इसका असर डिलीवरी सेवाओं पर दिखा।
- Written By: अपूर्वा नायक
Updated On:
May 17, 2026 | 12:55 PM
महाराष्ट्र गिग वर्कर्स का विरोध प्रदर्शन (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Gig Workers Demand: ईंधन की बढ़ती कीमतों ने महाराष्ट्र के लगभग 10 लाख गिग वर्कर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद ऐप आधारित डिलीवरी और परिवहन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों ने प्रति किलोमीटर न्यूनतम 20 रुपए भुगतान की मांग तेज कर दी है।
शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन का मुंबई और राज्य के कई हिस्सों में मिला-जुला असर देखने को मिला, जहां ब्लिंकिट जैसी क्विक डिलीवरी सेवाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई और कई स्थानों पर डिलीवरी समय दोगुना हो गया।
यूनियनों ने दी चेतावनी
- यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि भुगतान संरचना में जल्द सुधार नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स इस सेक्टर को छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शनिवार को देशभर में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने आंशिक विरोध प्रदर्शन किया। इसका असर मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई शहरों में देखने को मिला, जहां फूड डिलीवरी, कैब और क्विक कॉमर्स सेवाएं प्रभावित रहीं।
- गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन के आह्वानः गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर शनिवार दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप आधारित सेवाओं को धीमा रखने की अपील की गई थी। इसका असर ब्लिंकिट जैसी क्विक डिलीवरी सेवाओं पर भी पड़ा। जहां सामान्य दिनों में 10 से 15 मिनट में डिलीवरी होती है, वहीं कई इलाकों में डिलीवरी समय बढ़कर 25 से 30 मिनट तक पहुंच गया।
कर्मचारियों की आय पर हो रहा सीधा असर
- गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि ऐप आधारित कर्मचारी पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं और अब ईंधन कीमतों में वृद्धि ने उनकी आय पर सीधा असर डाला है। उन्होंने सरकार और कंपनियों से डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 20 रुपए प्रति किलोमीटर भुगतान लागू करने की मांग की।
- उनके अनुसार स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, उबर, ओला और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित हैं क्योंकि उनका पूरा काम दोपहिया वाहनों पर निर्भर है। ये हैं मांगेः यूनियन ने सरकार और ऐप आधारित कंपनियों से भुगतान संरचना में तत्काल संशोधन, सामाजिक सुरक्षा, बीमा सुविधाएं और गिग वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की है।
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देशभर में हैं 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स
- यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार विरोध का असर मिला-जुला रहा, लेकिन इससे कंपनियों और सरकार तक गिग वर्कर्स की नाराजगी का स्पष्ट संदेश पहुंचा है।
- महाराष्ट्र में लगभग 10 लाख गिग वर्कर्स कार्यरत हैं, जबकि देशभर में इनकी संख्या करीब 1.2 करोड़ बताई जा रही है।
- यूनियन का कहना है कि ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। पेट्रोल-डीजल के साथ वाहन सर्विसिंग, मेंटेनेंस और घरेलू खर्च बढ़ने के बावजूद कंपनियों ने किलोमीटर आधारित भुगतान और डिलीवरी शुल्क में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया है।
Maharashtra gig workers demand 20 rupees per km
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Published On:
May 17, 2026 | 12:55 PM
