गिग वर्कर्स की 5 घंटे की 'चक्का जाम' हड़ताल: पेट्रोल-डीजल की कीमतों और कम कमाई के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन

GIG Workers Strike: ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और ऐप-आधारित कंपनियों द्वारा कम भुगतान दरों के विरोध में शनिवार, 16 मई को देशभर के गिग वर्कर्स ने 5 घंटे की अस्थायी हड़ताल का आह्वान किया है।
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प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
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GIG Workers Protest India: देशभर में ऐप-आधारित टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स ने शनिवार (16 मई) को एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यह विरोध प्रदर्शन हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई वृद्धि और कंपनियों द्वारा दिए जा रहे कम कमीशन के खिलाफ है।

गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने सभी श्रमिकों से अपील की है कि वे दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी ऐप-बेस्ड सेवाएं पूरी तरह बंद रखें। यूनियन का कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन की कीमतों और अपर्याप्त भुगतान दरों की वजह से हजारों ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

ईंधन की कीमतों में 3 रुपये के इजाफे से बढ़ता खर्च

यह हड़ताल सरकारी तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के ठीक बाद हो रही है। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि हैदराबाद में पेट्रोल की दर 110.8 रुपये तक जा पहुंची है। ड्राइवरों का कहना है कि जहां एक तरफ ईंधन का खर्च बढ़ रहा है, वहीं ऐप कंपनियां अपने किराए और इंसेंटिव में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं।

वैश्विक तनाव के बीच तेल कंपनियों का घाटा

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच चुकी हैं। हालांकि, तेल कंपनियों का दावा है कि 3 रुपये की बढ़ोतरी के बावजूद वे अपनी पूरी लागत नहीं वसूल पा रहे हैं। अनुमान है कि कंपनियों को अब भी पेट्रोल पर 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

घर चलाना हुआ मुश्किल: गिग वर्कर्स की दलील

हड़ताल में शामिल कैब ड्राइवरों का कहना है कि कमीशन और ईंधन का खर्च निकालने के बाद उनके पास बहुत कम पैसा बचता है, जिससे घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। उनका अधिकांश समय सड़क पर गुजरता है, इसलिए ईंधन की बढ़ी हुई कीमतें सीधे उनकी दैनिक कमाई को प्रभावित करती हैं। गिग वर्कर्स ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और ऐप कंपनियों ने जल्द ही राहत नहीं दी, तो आने वाले दिनों में और भी बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।

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