फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला: महाराष्ट्र में 2011 तक के अतिक्रमण होंगे नियमित, 500 स्क्वायर फीट तक फ्री प्लॉट
Free Land Policy 2026: महाराष्ट्र सरकार ने 2011 तक के निवासी अतिक्रमण नियमित करने का बड़ा फैसला लिया है। 500 वर्ग फुट तक जमीन मुफ्त दी जाएगी, जबकि अतिरिक्त भूमि पर न्यूनतम शुल्क लिया जाएगा।
- Written By: अपूर्वा नायक
चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Encroachment Regularisation Policy: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 1 जनवरी 2011 तक के सभी निवासी अतिक्रमणों को नियमित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस संबंध में शासन द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।
उल्लेखनीय यह कि मुंबई शहर-उपनगर शामिल नहीं होंगे, योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि 500 वर्ग फुट तक के निवासी अतिक्रमणों को पूरी तरह से निःशुल्क नियमित किया जाएगा। यदि किसी परिवार का अतिक्रमण इससे अधिक क्षेत्र में है तो 1500 वर्ग फुट तक की सीमा के भीतर शेष अतिरिक्त भूमि के लिए प्रचलित बाजार मूल्य की केवल 10 प्रतिशत राशि कब्जे शुल्क के रूप में ली जाएगी।
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लेकिन 1500 वर्ग फुट से अधिक के अतिक्रमण को हटाया जाएगा। भूमि का आवंटन पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर ‘भोगवटादार वर्ग-2’ के रूप में किया जाएगा, जिससे महिलाओं को भी समान अधिकार प्राप्त होंगे।
सार्वजनिक स्थलों का अतिक्रमण नहीं होगा नियमित
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण और जनहित से जुड़ी जमीनों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा, नदी पात्र, नाले, चरागाह (गायरान), सार्वजनिक सड़क, वन क्षेत्र, श्मशान घाट, खेल के मैदान या अस्पताल और स्कूल के लिए आरक्षित जमीनों पर किए गए अतिक्रमणों को नियमित नहीं किया जाएगा। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना‘ के तहत वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। यह निर्णय मुंबई और मुबई उपनगर को छोड़कर शेष पूरे महाराष्ट्र में लागू होगा।
पारदर्शी प्रक्रिया और निगरानी तंत्र
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया गया है। जिलाधिकारी, उपविभागीय अधिकारी और तहसीलदार की अध्यक्षता वाली ये समितियां सीधे निर्णय लेंगी, जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
पात्रता की जांच के लिए 1 जनवरी 2011 से पहले का मतदाता पहचान पत्र, बिजली बिल या संपत्ति की रसीद जैसे प्रमाण मान्य होंगे। साथ ही, पिछले एक वर्ष से वहां रहने का ठोस सबूत देना अनिवार्य होगा।
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विकसित महाराष्ट्र की ओर एक कदम
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस अवसर पर कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी परिवार बेघर न रहे।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल भारतीय नागरिकों के ही अतिक्रमण नियमित किए जाएं और घुसपैठियों के पाए जाने पर पुलिस कार्रवाई की जाए।
यह कदम ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के संकल्प का हिस्सा है। सरकार हर तीन महीने में इस योजना की प्रगति की समीक्षा करेंगी।
