प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी पर कोर्ट सख्त, अमीरों को एलआईजी में शामिल करने पर फटकार

Bombay High Court ने सिडको की आवास योजना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए 26 हजार घरों की लॉटरी पर रोक लगा दी है। एलआईजी में अमीरों को शामिल करने के फैसले को गलत बताया गया।
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सिडको (pic credit; social media)
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CIDCO Housing Scheme Bombay High Court: मुंबई एवं नवी मुंबई में आम आदमी का अपना घर होने का सपना पूरा करने के लिए सिडको के घरों की तरफ उम्मीद से देखा जाता है।

लेकिन इसी सिडको ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों के नियमों में कुछ ऐसे बदलाव किए, जिससे सीधे अमीरों के लिए रास्ता और आसान बन गया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अब सिडको के उस फैसले को तगड़ा झटका दिया है, जिसमें 6 लाख रुपये से ज्यादा इनकम वालों को लो इनकम ग्रुप में शामिल किया गया था।

क्या हर घंटे 6 लाख रु कमाने वाला भी गरीब है?

कोर्ट ने सरकार और सिडको को सख्त लहजे में कहा है कि वे गरीबों के घरों का यह मजाक उड़ाना बंद करें, साथ ही कोर्ट ने 26 हजार घरों की लॉटरी पर रोक लगा दी है। इस केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभया मंत्री की बेंच ने सिडको की पॉलिसी पर गंभीर सवाल उठाए।

सिडको ने एलआईजी यानी लो इनकम ग्रुप के लिए ऊपरी इनकम लिमिट हटा दी थी, इसका मतलब था कि कोई सुपर रिच व्यक्ति भी, जिसकी इनकम 6 लाख रुपए प्रति घंटा है, इन घरों के लिए अप्लाई कर सकता था।

कोर्ट ने पूछा कि अगर कोई व्यक्ति मर्सिडीज में आता है तो उसे लो इनकम ग्रुप में कैसे रखा जा सकता है? कोर्ट ने इस सब को चौंकाने वाला और सिर्फ मुनाफाखोरी को बढ़ावा देने वाला बताया।

स्कीम का असली मकसद ही खत्म हो गया

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर और कम इनकम वाले ग्रुप के लिए सालाना इनकम लिमिट 3 से 6 लाख रुपये तय की गई है। साथ ही। इस स्कीम का फायदा सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलने की उम्मीद है, जिनका देश में कहीं भी पक्का घर नहीं है। लेकिन, सिडको ने इन शर्तों को दरकिनार करते हुए घरों की कीमत 75 लाख रुपये से ज्यादा कर दी और इनकम लिमिट भी हटा दी। याचिकाकर्ता सुमित साठे और अन्य लोगों ने प्रशासन की इस मनमानी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सिडको ने कोर्ट में दावा किया कि यह स्कीम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नहीं है, लेकिन कोर्ट ने उनके दावे को खारिज कर दिया।

पक्का घर वालों को नहीं मिलेगा मकान

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के बयान का जिक्र किया, घटना कितनी भी अच्छी क्यों न हो, उसकी सफलता उसे लागू करने वाले लोगों पर निर्भर करती है। इसी तरह, हालांकि यह स्कीम गरीबों को सस्ते घर देने के लिए है, लेकिन अधिकारियों ने इसे महंगा बना दिया है, क्या इस स्कीम का इस्तेमाल सिर्फ अमीरों के इन्वेस्टमेंट और मुनाफे के लिए किया जा रहा है?

कोर्ट ने प्रशासन पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाए, कोर्ट ने साफ किया है कि जिनकी इनकम 6 लाख रुपये से कम है, लेकिन देश में कहीं भी पक्का घर है, वे भी इस स्कीम का फायदा नहीं उठा पाएंगे।

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