राज्य में बाल संरक्षण व्यवस्था की होगी जिला-वार समीक्षा, 15 जुलाई तक रिपोर्ट अनिवार्य,आयोग ने जारी किए निर्देश
Maharashtra Child Protection Review Report: महाराष्ट्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को 15 जुलाई तक बाल संरक्षण व्यवस्था की भौतिक समीक्षा कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
बाल स्नेही महाराष्ट्र (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Child Protection Review Report Deadline: महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को जिले की बाल संरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह कदम ‘बाल स्नेही महाराष्ट्र’ के निर्माण और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है।
आयोग ने सभी जिलाधिकारियों और जिला बाल संरक्षण इकाई के अध्यक्षों को आदेश दिया है कि वे 15 जुलाई, 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपें. यह रिपोर्ट केवल जानकारी जुटाकर नहीं, बल्कि जिलाधिकारियों द्वारा स्वयं भौतिक सत्यापन करके वास्तविक रूप में तैयार की जानी चाहिए।
समीक्षा के मुख्य बिंदु
आयोग द्वारा मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट में जिले के सभी पंजीकृत और गैर-पंजीकृत आवासीय संस्थानों की स्थिति का व्यापक आकलन किया जाएगा। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन और बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
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इसके अलावा बाल विवाह रोकथाम, बाल श्रम उन्मूलन, पॉक्सो (पीओसीएसओ) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की प्रगति तथा गोद लेने की प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन की भी गहन समीक्षा की जाएगी।
आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े सभी कानूनों का जिलों में प्रभावी ढंग से पालन हो। रिपोर्ट के आधार पर आयोग आगे की कार्रवाई तय करेगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित जिलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन भी करेगा।
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आयोग की भावी कार्रवाई
महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी जिलों से प्राप्त रिपोर्टों की समीक्षा के बाद आवश्यकता पड़ने पर संबंधित जिलों का दौरा कर व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाएगा। आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि रिपोर्ट में दी गई जानकारी वास्तविक स्थिति के अनुरूप हो।
यदि कोई जिला निर्धारित समय सीमा यानी 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता है, तो आयोग उपलब्ध अभिलेखों और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा। आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को समयबद्ध और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए बाल संरक्षण व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।
