अमरावती में एक वर्ष में 383 बच्चों और 26 माताओं की मौत, बाल अधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

Maternal Deaths: अमरावती जिले में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 383 बच्चों और 26 माताओं की मौत के मामले पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीर चिंता जताई है।
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Maternal and Child Health (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Amravati Child Death: अमरावती जिले में कुपोषण और मातृशिशु स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जिले में 383 बच्चों तथा 26 माताओं की मृत्यु दर्ज की गई है। इस गंभीर स्थिति पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवालआंकड़ों के सामने आने के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए आयोग की अवर सचिव वंदना जैन के माध्यम से 18 जून 2026 को जिला प्रशासन को पत्र भेजकर विस्तृत जानकारी मांगी है।

383 बाल मृत्यु और 26 मातृ मृत्यु से हड़कंप

आयोग ने निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान हुई 383 बाल मृत्यु और 26 मातृ मृत्यु का तहसीलवार तथा संस्थानवार विवरण प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि ये मौतें जिला अस्पताल, ग्रामीण अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा निजी अस्पतालों में हुईं और इनके पीछे वास्तविक कारण क्या थे।

स्वास्थ्य सेवाओं की होगी जांच

आयोग यह भी जांच करेगा कि ये मौतें केवल प्राकृतिक कारणों से हुईं या फिर स्वास्थ्य सेवाओं में कमी, समय पर उपचार न मिलने, चिकित्सकीय लापरवाही अथवा प्रशासनिक त्रुटियों के कारण हुईं। इसके अलावा बच्चों में गंभीर एवं मध्यम कुपोषण, कम वजन, निमोनिया, श्वसन संबंधी जटिलताएं तथा माताओं में गंभीर एनीमिया, समय पर इलाज न मिलना और उपचार में देरी जैसे कारणों की भी अलग से समीक्षा की जाएगी।

आयोग ने मांगी यह जानकारी

जांच/रिपोर्ट का विषय मांगी गई जानकारी
तहसीलवार एवं संस्थानवार मृत्यु का विवरण प्रत्येक तहसील और सरकारी/निजी स्वास्थ्य संस्थान में हुई बाल एवं मातृ मृत्यु का अलग-अलग विवरण।
प्रत्येक मृत्यु का वास्तविक कारण हर मामले में मृत्यु के वास्तविक चिकित्सकीय कारणों की जानकारी।
उपचार में देरी या लापरवाही यह स्पष्ट किया जाए कि उपचार में देरी, चिकित्सकीय लापरवाही या प्रशासनिक त्रुटि तो जिम्मेदार नहीं थी।
सरकारी एवं निजी अस्पतालों की रिपोर्ट सरकारी और निजी अस्पतालों में हुई मौतों का अलग-अलग विश्लेषण और रिपोर्ट।
स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और उपलब्ध सुविधाओं का समग्र मूल्यांकन।
रिक्त पदों की स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं ग्रामीण अस्पतालों में रिक्त पदों का विवरण।
विशेषज्ञ व स्टाफ की उपलब्धता बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ एवं आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धता की जानकारी।
चिकित्सा संसाधनों की स्थिति दवाइयों का भंडार, वेंटिलेटर, एनआईसीयू (NICU) एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता।
कुपोषण व मातृ-शिशु स्वास्थ्य का मूल्यांकन बच्चों में कुपोषण, कम वजन, निमोनिया तथा माताओं में एनीमिया और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा।
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