ठाणे: गर्भवती महिला की जान से खिलवाड़! उल्हासनगर के सरकारी प्रसव अस्पताल की जांच रिपोर्ट ने खोली पोल
Hospital Negligence Investigation: उल्हासनगर सरकारी प्रसव अस्पताल की जांच में 34 दिन ऑपरेशन थिएटर बंद रहने, गर्भवती महिला के इलाज में लापरवाही और 65 मरीजों को रेफर करने जैसी गंभीर खामियां सामने आईं।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
उल्हासनगर सरकारी प्रसव अस्पताल (सोर्स:AI)
Hospital Negligence Investigation Report: उल्हासनगर कैंप क्रमांक 4 स्थित सरकारी प्रसव अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक प्रसव सेवाएं प्रदान करने का दावा करने वाली उक्त सरकारी अस्पताल की स्वास्थ्य प्रणाली की चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है।
एक गर्भवती महिला की शिकायत के बाद की गई आधिकारिक जांच में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश महकमे के वरिष्ठों द्वारा की गई है, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली की कार्यपद्धति उजागर हुई है।
हॉस्पिटल स्टाफ का मरिजों के साथ बर्ताव
द्वारा बरती गई लापरवाही की शिकायत अभिलाष डावरे ने वरिष्ठों से लिखित रूप से की थी, उसके बाद जांच हुई, इसमें वरिष्ठों ने पाया कि 34 दिनों तक ऑपरेशन थिएटर बंद रखने, गंभीर हालत में गर्भवती महिला को समय पर आवश्यक उपचार न देने, निकटतम सरकारी अस्पताल उपलब्ध होने के बावजूद उचित रेफर प्रक्रिया का पालन न करने, महत्वपूर्ण CCTV फुटेज को सुरक्षित न रखने और घोर लापरवाही बरतने का आरोप है।
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दिलचस्प बात यह है कि शिकायतकर्ता पत्रकार अभिलाष डावरे ने आपत्ति जताई थी कि शुरू में नियुक्त की गई पहली जांच समिति ने अस्पताल प्रशासन की भूमिका का समर्थन किया था। उनके द्वारा आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराने के बाद, वरिष्ठ स्तर पर एक दूसरी जांच समिति नियुक्त की गई। इस समिति की विस्तृत रिपोर्ट ने अस्पताल में कई गंभीर खामियों, प्रशासनिक लापरवाही और मरीजों के जीवन से संबंधित मामलों में घोर लापरवाही को उजागर किया है।
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जांच रिपोर्ट में ये हुआ खुलासा
शिकायत के अनुसार 12 फरवरी, 2026 को वृषाली अभिलाष डावरे को गर्भावस्था में उत्पन्न जटिलताओं के कारण उल्हासनगर-4 स्थित सरकारी प्रसव गृह अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान शिशु की हृदय गति काफी स्तर तक बढ़ गई, ऐसी गंभीर स्थिति में भी आवश्यक आपातकालीन उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया।
इसके विपरीत जांच में कहा गया है कि निकटतम सेंट्रल सरकारी अस्पताल उपलब्ध होने के बावजूद, मरीज को बिना किसी समन्वय के आधी रात को कहीं और रेफर किया गया। जांच रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष यह है कि प्रसव वार्ड के दोनों ऑपरेशन थिएटर एक ही समय पर बंद कर दिए गए थे।
एक अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर 2024 से मार्च 2026 तक बंद रहा, जबकि दूसरा ऑपरेशन थिएटर मरम्मत के लिए बंद था। परिणामस्वरूप, 7 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक 34 दिनों की अवधि के लिए अस्पताल में कोई भी ऑपरेशन थिएटर कार्यरत नहीं था।
ऑपरेशन थिएटर की मरम्मत के संबंध में अपने वरिष्ठों से पूर्व अनुमति लिए बिना अपने पद का दुरुपयोग किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आवश्यक सेवाओं में देरी हुई और मार्च के अंत तक वित्तीय लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से निर्णय को टाला गया।
जांच रिपोर्ट में दर्ज किया गया है कि इस अवधि के दौरान 65 गर्भवती महिलाओं को अन्य अस्पतालों में भेजा गया। यह स्पष्ट है कि महिलाओं के लिए बने विशेष सरकारी अस्पताल में ऐसी स्थिति उत्पन्न होना स्वास्थ्य व्यवस्था की एक गंभीर विफलता है।
