Devendra Fadnavis Cabinet Meeting (फोटो क्रेडिट-X)
Devendra Fadnavis Cabinet Meeting: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आज (7 अप्रैल 2026) हुई कैबिनेट बैठक में महाराष्ट्र के भविष्य को बदलने वाले पांच महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। ये फैसले न केवल राज्य के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगे, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र और आपदा प्रबंधन में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी से लेकर कृषि बिजली वितरण तक के लिए नई रूपरेखा तैयार की है।
इन निर्णयों का सीधा असर किसानों, आईटी पेशेवरों और आपदा प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों पर पड़ेगा। विशेष रूप से ई-पंचनामा और बाढ़ नियंत्रण जैसी योजनाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
राज्य सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT), इलेक्ट्रॉनिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए एक नया स्वतंत्र विभाग गठित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब ‘सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय’ को ‘आयुक्त कार्यालय’ में बदल दिया जाएगा। सभी जिलों के लिए एक स्थायी IT कैडर बनाया जाएगा, जिससे डिजिटल गवर्नेंस और एआई अनुसंधान को नई गति मिलेगी।
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महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (MRSAC) को अब कंपनी अधिनियम के तहत एक स्वतंत्र कंपनी बनाया जाएगा। इस बदलाव से ई-पंचनामा, जलयुक्त शिवर, शहरी नियोजन और खनिज अध्ययन जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में तेजी आएगी। इससे उपग्रह तकनीक का उपयोग करके नुकसान का सटीक और त्वरित आकलन संभव होगा।
प्रशासन में गतिशीलता लाने के लिए महाराष्ट्र भू-प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग केंद्र (महाजियोटेक) नामक कंपनी की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र भू-स्थानिक नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देगा। छात्रों और पेशेवरों के लिए इसके माध्यम से विशेष शैक्षिक कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।
ऊर्जा विभाग में बड़े सुधार करते हुए महावितरण का वित्तीय पुनर्गठन किया जाएगा। सरकार ₹32,679 करोड़ के ऋण के लिए सरकारी बॉन्ड जारी करेगी। सबसे महत्वपूर्ण फैसला कृषि वितरण व्यवसाय को अलग करने का है। इसके साथ ही, महावितरण को भविष्य में पूंजी बाजार (Stock Market) में सूचीबद्ध (List) करने की योजना को भी हरी झंडी मिल गई है।
आपदा प्रबंधन के लिए विश्व बैंक से ₹165 करोड़ के फंड को मंजूरी दी गई है। इसके तहत कृष्णा घाटी (कोल्हापुर, सांगली, इचलकरंजी) में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए विशेष ड्रेनेज योजनाएं बनाई जाएंगी। साथ ही, आपदा प्रभावितों को गृह ऋण में रियायत और MSME सेक्टर को बीमा कवर देने का प्रावधान किया गया है।